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12 फीट तक खुदाई, मिला पहली मंजिल का तल… संभल में बावड़ी की तस्वीरें आईं सामने

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संभल,

संभल के चंदौसी में ऐतिहासिक बावड़ी की खुदाई के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. यहां 12 फीट की खुदाई के बाद मजदूरों को बावड़ी की पहली मंजिल का तल मिला है. इसके बाद स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है. चंदौसी की यह बावड़ी कई दशकों से मिट्टी और कचरे के ढेर में दबी थी. इसके अंदर पुराने समय की पत्थरों से बनी संरचनाएं हैं. अंदर के रास्ते हैं. एएसआई सर्वेक्षण टीम ने लक्ष्मणगंज क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिली 150 साल पुरानी बावड़ी का निरीक्षण किया है.

संभल में रानी सुरेंद्र बाला की बावड़ी की खुदाई का काम आज चौथे दिन भी चालू है. यहां बावड़ी के अंदर खुदाई की जा रही है. मानव श्रृंखला बनाकर फावड़ों से मिट्टी निकाली जा रही है. अब तक की गई खुदाई में बावड़ी की पहली मंजिल का तल मिल चुका है. इसके बाद बुलडोजर के जरिए मिट्टी को ट्रैक्टरों में भरकर हटाया जा रहा है. चौथे दिन हो रही खुदाई को देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ लग गई.

एक व्यक्ति से बात की तो उसने कहा कि हम चंदौसी के रहने वाले हैं. हमें पता चला कि यहां बावड़ी निकली है. मन में उत्सुकता थी कि बावड़ी होती क्या है. इसे अंदर से देखने की जिज्ञासा है. प्राचीन समय में इसे कैसे बनाया गया, इसी के बारे में जानने की इच्छा है. भीड़ में मौजूद ज्यादातर लोग बावड़ी के बारे में जानना चाहते थे.

दरअसल, यहां प्राचीन बावड़ी करीब 1857 में यहां के राजा ने रानी के लिए बनवाई थी. असीम अग्रवाल ने कहा कि यहां सुना था कि बावड़ी निकली है. बावड़ी को देखने की जिज्ञासा है कि आखिर क्या चीज है, बावड़ी कैसी है. यह पूछने पर कि क्या इसके नीचे आप गए थे, कोई जानकारी मिली है? इस पर असीम ने कहा कि ये बताया जा रहा है कि इसके अंदर तीन कमरे हैं, कुछ बरामद है. इस तरीके की कुछ जानकारी मिली है. एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हमने देखा था कि यहां पर दो मंजिल का कुआं है. कुएं के बीच में नल लगा हुआ था.

फिलहाल बावड़ी के अंदर से मिट्टी को निकालने का काम चल रहा है. इसको पूरी तरह से खाली करने के बाद दिखेगा कि कितने मंजिल की बावड़ी इसके अंदर है. यहां बड़ी संख्या में देखने वालों की भीड़ है. वहीं भारी सुरक्षा बल भी तैनात है. अभी 16 मजदूरों को खुदाई के काम में लगाया गया है.

यहां खुदाई में जुटे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर न तो कोई एंबुलेंस है और न फायर ब्रिगेड. कर्मचारियों के सिर पर कोई हेलमेट भी नहीं है? इस सवाल के जवाब में जिम्मेदारों ने कहा कि हम गहराई में नहीं गए, अभी हम सीढ़ियां ही साफ कर रहे हैं. जैसे-जैसे हम नीचे उतरेंगे, स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण ध्यान रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को इसके बारे में बताएंगे, जो सेवाएं हैं, वो सब सेवाएं दी जाएंगी. यहां काम कर रहे मजदूर पीने के लिए थैलियों में पानी भरकर ला रहे थे. बोतलों की व्यवस्था नहीं थी. कुछ मजदूरों ने कहा कि हमारे लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है.

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