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दिमाग खाने वाले अमीबा से अमेरिका में पहली मौत, दहशत में लोग, जानें यह कितना खतरनाक

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वॉशिंगटन

अमेरिका में दिमाग खाने वाले अमीबा से एक व्यक्ति की मौत के बाद हाहाकार मचा हुआ है। लोग कोरोना वायरस के बाद नई महामारी के फैलने की आशंका से डरे हुए हैं। फ्लोरिडा के स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि फरवरी में शार्लोट काउंटी में एक व्यक्ति की दिमाग खाने वाले अमीबा के कारण मौत हो गई थी। इसे नेगलेरिया फाउलेरी भी कहा जाता है। इस मौत के बाद फ्लोरिडा के स्वास्थ्य विभाग ने शार्लोट काउंटी के लोगों के लिए चेतावनी भी जारी की है। इससे पहले एक दक्षिण कोरियाई नागरिक की भी दिमाग खाने वाले अमीबा के कारण मौत हो चुकी है। यह व्यक्ति मरने से कुछ दिनों पहले ही थाईलैंड की यात्रआ से स्वदेश लौटा था।

जांच में जुटी वैज्ञानिकों की टीम
फ्लोरिडा स्वास्थ्य विभाग के प्रेस सचिव जे विलियम्स ने कहा कि इस संक्रमण की परिस्थितियों को समझने के लिए एक महामारी वैज्ञानिकों की टीम जांच कर रही है। मैं पुष्टि कर सकता हूं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण मौत नेगलेरिया फाउलेरी के कारण हुई है। हमने मृतक की पहचान को गुप्त रखने के लिए नाम का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की पुष्टि फरवरी के अंत में हुई थी। इसका संबंध नल के पानी के इस्तेमाल और नाक से पानी निकालने की आदतों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही साझा की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
दिमाग खाने वाले अमीबा से मौत की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने सलाह दी है कि सिर्फ फिल्टर पानी ही पीएं। उन्होंने नल के पानी के इस्तेमाल से पहले उसे कम से कम एक मिनट तक उबालने और फिर उसे ठंडा करने की सलाह दी है। जे विलियम्स ने आगे कहा कि नेगलेरिया फाउलेरी के साथ संक्रमण दुर्लभ है और केवल तभी हो सकता है जब अमीबा से दूषित पानी नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। नल का पानी पीने से आप संक्रमित नहीं हो सकते।

क्या है दिमाग खाने वाला अमीबा
दिमाग खाने वाला अमीबा को नेगलेरिया फाउलेरी के रूप में भी जाना जाता है। यह एकल कोशिका वाला जीव है, जो विशेष रूप से गर्म और मीठे पानी या जमीन में मिलता है। एक गर्म मीठे पानी का वातावरण जैसे कि झीलें, नदियाँ, और भूतापीय गर्म झरने इस अमीबा का पसंदीदा निवास स्थान हैं। ऐसी जगहों पर यह अमीबा तेजी से पनपता है। यह एककोशिकीय जीव नम मिट्टी में भी रह सकता है। मानव संक्रमण के मामले में, थर्मोफिलिक अमीबा इंसानों के पानी में उतरने, खासकर गोताखोरी जैसे काम के दौरान नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है।

कैसे होती है इंसान की मौत
यह अमीबा नाक से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी तक चला जाता है। यह लाल रक्त कोशिकाएं (एरिथ्रोसाइट्स) और तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इससे मस्तिष्क के ऊतकों की सूजन और उनका नष्ट होना शुरू हो जाता है। ऐसे में यह एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है। इस बीमारी को प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (पीएएम) कहा जाता है। यह बीमारी मानव संक्रमण से एक दूसरे में नहीं फैल सकती है।

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