नई दिल्ली
लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर ऐसा बयान दिया है कि भारत में तो उनकी जमकर तारीफ हो रही है, लेकिन पाकिस्तान पूरी तरह बौखला चुका है। असल में एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर ही जवाब देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पीओके को लेकर भारत की नीति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि 370 हटाना पहला कदम था, सामाजानिक न्याय बहाल होना दूसरा और चुनाव में ज्यादा मतदान होना तीसरा कदम। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के चुराए गए हिस्से की वापसी चौथा कदम माना जाएगा।
पाकिस्तान को क्यों लगी मिर्ची?
अब जयशंकर का यही बयान पाकिस्तान को नाराज कर गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने दो टूक कहा कि कश्मीर को लेकर आधारहीन दावे करने से भारत को बचना चाहिए, इसके बजाय उसे जम्मू-कश्मीर के उस बड़े हिस्से को छोड़ देना चाहिए जिस पर 77 साल से उसने कब्जा कर रखा है। सभी को समझना चाहिए कि पीओके का मामला अभी विवादित चल रहा है, जयशंकर जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं, यह गलत है।
पाक ने जब उठाया कश्मीर मुद्दा, हुई बेइज्जती
पाक मंत्रालय ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत की सेना ने स्टेटस बदलने की पूरी कोशिश की है, लेकिन इससे वास्तविकता नहीं बदलने वाली है। सेना के दम पर जो भी कदम उठाने की कोशिश होगी, उससे किसी की भी मुश्किल हल नहीं होने वाली। अब यह कोई पहली बार नहीं है जब विदेशी मंच पर पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया हो और उसे मुंहतोड़ जवाब ना मिला हो।
जयशंकर ने क्या बोला था?
जानकारी के लिए बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने काफी विस्तार से भारत का कश्मीर प्लान दुनिया के सामने रखा था। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में वास्तव में हमने बहुत अच्छा काम किया है। मुझे लगता है कि हमने इसके अधिकांश मुद्दों को हल करने का काम किया है। मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 को हटाना पहला कदम था। कश्मीर में विकास, आर्थिक गतिविधि और सामाजिक न्याय को बहाल करना दूसरा और फिर तीसरा कदम जम्मू-कश्मीर में अच्छे वोटिंग परसेंटेज के साथ चुनाव कराना था।
क्या पीओके भी भारत के साथ आना चाहता है?
एस जयशंकर ने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि अब हम जिस दिन का इंतजार कर रहे हैं, वो है कश्मीर के उस हिस्से की वापसी, जिसे अवैध तौर पर पाकिस्तान ने चुराया है. जब ये हो जाएगा तो मैं आपको आश्वासन देता हूं कि कश्मीर का समाधान हो जाएगा। वैसे जो बात एस जयशंकर ने कही है, कुछ वैसा माहौल कई बार पीओके में देखने को मिल चुका है, वहां के कई लोग भारत के साथ मिलना चाहते हैं,
