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मरवा द‍िया! जब गोंडा में घनश्‍याम शुक्‍ला की मौत के बाद बृजभूषण शरण सिंह को आया था अटल बिहारी वाजपेयी का फोन

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नई दिल्ली

भारतीय कुश्ती संघ अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह और अन्य के खिलाफ पहलवानों का धरना जारी है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के चीफ के खिलाफ FIR तो दर्ज हो गई है लेकिन वह अपने पद पर बरकरार हैं। उनके खिलाफ महिला पहलवानों का यौन शोषण करने समेत कई और गंभीर आरोप हैं।

बृजभूषण सिंह बाहुबली छवि के नेता माने जाते हैं, उनपर गंभीर आरोप लगना नया नहीं है। वह टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (TADA) एक्ट के तहत जेल भी जा चुके हैं। एक इंटरव्यू में मर्डर करने की बात भी स्वीकार चुके हैं। उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनके खिलाफ चार मामले लंबित हैं, जिसमें डकैती (धारा 392) और हत्या के प्रयास (धारा 307) जैसे केस भी हैं।

एक नेता की मौत और वाजपेयी का सवाल
साल 1991 में अपने जन्म स्थान गोंडा से कांग्रेस नेता को एक लाख से अधिक वोटों से हारने वाले बृजभूषण सिंह के सांसदी का पहला कार्यकाल अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि उन्हें साल 1996 की शुरुआत में आत्मसमर्पण करना पड़ा। भाजपा सांसद पर डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों को अपने यहां शरण देने का आरोप लगा था। आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के संदेह पर उन्हें टाडा के तहत तिहाड़ जेल भेज में रखा गया।

इस दौरान 1996 के लोकसभा चुनाव हुए। जेल में बंद बृजभूषण सिंह की जगह उनकी पत्नी ने गोंडा से चुनाव लड़ा और जीत गईं। दाऊद वाले मामले में भाजपा के एक पूर्व सांसद को दोषी ठहराया गया लेकिन बृजभूषण को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

अगला लोकसभा चुनाव 2004 में हुआ लेकिन इस बार गोंडा की सीट भाजपा ने घनश्याम शुक्ला के दे दिया और बृजभूषण सिंह को बलरामपुर से टिकट मिला। पूर्व मंत्री और गोंडा से भाजपा प्रत्याशी घनश्याम शुक्ला की 26 अप्रैल, 2004 को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, रात 11.15 बजे गोंडा में उनके घर के पास खड़े ट्रक से टकराने से शुक्ला की मौत हो गई थी। शुक्ला की विधवा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र फैक्स कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।

साल 2014 में स्क्रॉल.इन की सुप्रिया शर्मा को दिए इंटरव्यू में बृजभूषण सिंह इस घटना को कुछ इस तरह याद करते हैं, “मेरे विरोधियों ने यह अफवाह फैलाई कि यह दुर्घटना नहीं, यह एक हत्या थी… अटलजी ने मुझे फोन किया और कहा ‘मरवा दिया’। उस दिन से मेरा बीजेपी के साथ मतभेद होने लगे।”

राम मंदिर आंदोलन और बृजभूषण सिंह
करीब तीन दशकों से भारतीय राजनीति में सक्रिय बृजभूषण सिंह राम मंदिर आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे। उनकी पढ़ाई लिखी भी इसी क्षेत्र से हुई थी। उन्होंने 1985 में फैजाबाद के डॉ आरएमएल अवध विश्वविद्यालय से एलएलबी में ग्रेजुएशन किया था।

राम मंदिर आंदोलन में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए, वह खुद एक इंटरव्यू में बताते हैं, “जब 1989 में राम जन्मभूमि आंदोलन हुआ, तब मुलायम सिंह द्वारा गिरफ्तार किए जाने वाले क्षेत्र का पहला व्यक्ति मैं था। 1992 में विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया जाने वाला पहला व्यक्ति मैं था।”

साल 2020 में बाबरी विध्वंस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ-साथ बृजभूषण सिंह को भी सीबीआई ने सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। दरअसल, भाजपा में शामिल होने से पहले ही बृजभूषण सिंह संघ परिवार (RSS) के नजदीक आ गए थे। वह दिवंगत वीएचपी प्रमुख अशोक सिंघल के करीबी माने जाते थे।

जब 1991 में राम मंदिर को लेकर देश में उथल-पुथल मचा हुआ था, तब बृजभूषण सिंह ने भाजपा की टिकट पर अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस नेता आनंद सिंह को हराया। जवानी से ही हिंदुत्व की राजनीति करने वाले बृजभूषण सिंह के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था, जब उन्हें भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद वह कुछ साल के लिए समाजवादी पार्टी में चले गए थे।

भाजपा ने क्यों निकाला दिया था?
साल 2008 की बात है। यूपीए सरकार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण विश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। लोकसभा में बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी पार्टी भाजपा के खिलाफ क्रॉस-वोटिंग की। भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया। बृजभूषण सिंह के साथ भाजपा के सात और सांसद निकाले गए थे। यह फैसला भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया था।

आडवाणी चाहते हैं कि दलबदलू सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाए। आडवाणी ने कहा, “क्रॉस वोटिंग के बिना यूपीए की जीत नहीं होती। मैंने कभी इतना आहत महसूस नहीं किया।” इस कार्रवाई के बाद बृजभूषण सिंह समाजवादी पार्टी में चले गए। 2009 में उन्होंने कैसरगंज सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लेकिन 2014 में वह फिर भाजपा में वापस आ गए।

बृजभूषण सिंह का प्रभाव
बृजभूषण सिंह उत्तर प्रदेश में गोंडा, कैसरगंज और बलरामपुर निर्वाचन क्षेत्रों से छह बार सांसद रहे हैं। वर्तमान में कैसरगंज से सांसद हैं। इंडियन एक्सप्रेस के श्यामलाल यादव की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बृजभूषण सिंह उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक स्व-वित्तपोषित कॉलेज चलाते हैं। वह या उनकी पत्नी साल 1991 से सांसद हैं, 1998 में सिर्फ एक बार चुनाव हारे हैं। जाहिर है बृजभूषण सिंह का कुछ क्षेत्रों में इतना प्रभाव है कि राजनीतिक पार्टियां उनसे किनारा नहीं कर पातीं।

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