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बिहार में अब नीतीश के बुने चक्रव्यूह के 7 द्वार कैसे पार करेंगे पीएम नरेंद्र मोदी?

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नई दिल्ली

आखिरकार बिहार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का डर सच हो ही गया। अब बीजेपी को इस गठबंधन की काट ढूंढनी होगी। नीतीश कुमार ने राज्य में एक ऐसा चक्रव्यूह बना दिया है जिसे पार करने के लिए बीजेपी को नए हथियार ढूंढने होंगे। 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जनता दल यूनाइडेट (जेडीयू) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के हाथों बड़ी पराजय मिली थी। आरजेडी का राज्य में मुस्लिम और यादव वोट बैंक पर कब्जा है। ये वोटर राज्य के कुल वोट का एक तिहाई हिस्सा हैं। ऐसे में अब बीजेपी अपने तुरुप के इक्के पीएम नरेंद्र मोदी के करिश्मे के भरोसे है। पार्टी का मानना है कि बिहार में 2015 वाले नतीजे नहीं आने वाले हैं। वो समय गुजर चुका है और पार्टी अब पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतरेगी।

नीतीश के चक्रव्यूह से कैसे निपटेगी बीजेपी?
बीजेपी को छोड़ आरजेडी के साथ जाने वाले नीतीश ने बिहार में भगवा दल के लिए तगड़ा चक्रव्यूह बना दिया है। आठवीं बार शपथ लेने जा रहे नीतीश के साथ जेडीयू (45), आरजेडी (79), कांग्रेस (19), सीपीआई एमएल (12), सीपीएम (2), सीपीआई (2) और हम (4) जैसे दलों का सतरंगी गठजोड़ है। बीजेपी के 77 विधायकों के साथ राज्य की एकलौती विपक्षी दल बन गई है। ऐसे में नीतीश के कुनबे में शामिल 7 दलों के मजबूत जनाधार वाले गठजोड़ से पीएम मोदी और बीजेपी कैसे निपटेगी यह देखना रोचक होगा।

नीतीश खड़ी करेंगे बीजेपी के लिए चुनौती!
नीतीश कुमार के साथ कुर्मी और कुशवाहा वोट बैंक है। इसके अलावा अति पिछड़ी जातियां का भी समर्थन जेडीयू को मिलता रहा है। ऐसे में बीजेपी के लिए आने वाले वक्त में कई चुनौतियां होंगी।

बीजेपी भी पूरी तरह तैयार
इन सारी चुनौतियों से बीजेपी वाकिफ है और वो इसके लिए तैयार भी हो गई है। पार्टी को पीएम नरेंद्र मोदी  की लोकप्रियता पर भरोसा है। खास तौर पर पीएम मोदी का ओबीसी होना। इसका फायदा बीजेपी को बिहार में मिल सकता है। बीजेपी तमिलनाडु से लेकर उत्तर भारत में इसका फायदा उठा सकती है। तमिलनाडु और उत्तर भारत के राज्यों में पिछड़ों की बड़ी आबादी रहती है। इसके अलावा बीजेपी को हिंदुत्व के मुद्दे पर बड़ा समर्थन मिल रहा है और ये जाति फैक्टर को तोड़ सकता है।

2024 में क्या होगा, कहना मुश्किल
बीजेपी के एक नेता ने कहा कि 2024 में क्या होगा ये कहना तो बेहद मुश्किल है। क्योंकि आम चुनाव होने में अभी दो साल का वक्त है। लेकिन ये तो तय है कि 2015 जैसा कुछ नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि लालू यादव और नीतीश ने 7 साल पहले 2015 में ये सफलता हासिल की थी। ये चुनाव सवर्ण बनाम पिछड़े पर का मुद्दा बनाकर लड़ा गया था। जब जेडीयू और आरजेडी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था तब बीजेपी ने बड़ी सफलता हासिल की थी।

बिहार में एकलौता विपक्षी दल बनी बीजेपी
नीतीश कुमार के आरजेडी के साथ सरकार बनाने के बाद अब बीजेपी राज्य में एकलौती विपक्षी पार्टी बन गई है। पार्टी ने नेता इस मौके को खुद को मजबूत बनाने के तौर पर इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं। यही नहीं, पार्टी नीतीश के खिलाफ नाराजगी को भी भुनाने की कोशिश करेगी, जैसाकि आरजेडी ने विपक्ष में रहते हुए भुनाने की कोशिश की थी। एक सूत्र ने बताया कि नीतीश कुमार कोई नया चेहरा तो रहे नहीं। उनकी विश्वसनीयता शून्य हो गई है।

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