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अमर हो सकता है इंसान… इस समुद्री जीव में ऐसा क्या दिखा कि वैज्ञानिकों ने कर दिया इतना बड़ा दावा

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वॉशिंगटन

अमरता शुरू से ही एक विवादित विषय रहा है। प्राचीन धर्म ग्रंथों में कई ऐसे महापुरुषों का जिक्र है, जिन्हें अमरता प्राप्त थी। लेकिन, यह आज के समय में बिलकुल भी संभव नहीं है। आज न तो हवा शुद्ध बची है और ना ही पानी। धरती पर बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं है। इन सबके बीच वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसे शोध में सफलता पाई है, जिसके आधार पर भविष्य में इंसानों को अमर बनाया जा सकता है। अगर सब कुछ सही चला तो इंसानों की बढ़ती उम्र पर रोक लगाई जा सकेगी यानी वो हमेशा जवान बना रहेंगे यानी उन्हें बुढ़ापा का सामना नहीं करना होगा। इसे अमर जीवन के रहस्य की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

जेलिफिश की प्रजाति में उम्र को रोकने की क्षमता
इस शोध को स्पेन में ओविएडो यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोकेमेस्ट्री एंड मॉलीक्यूलर बॉयोलाजी की एक टीम अंजाम दे रही है। यह टीम पृथ्वी पर मौजूद अमरता प्राप्त जीवों में से एक का अध्ययन कर रही है। इस जीव का नाम जेलिफिश है, जिसे ट्यूरिटोप्सिस दोहरनी (Turritopsis Dohrnii) के नाम से जाना जाता है। इसमें वयस्क जीवन से दोबारा लार्वा स्टेज में वापस जाने की क्षमता है। हालांकि, किसी बीमारी या दूसरे जीव के खाने के कारण जेलीफिश का अंत हो सकता है।

जब तक चाहे, तब तक जीवित रह सकता है जेलिफिश
प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन को कंपेरेटिव जीनोमिक्स ऑफ मॉर्टल एंड इम्मोर्टल निडेरियन्स अनवील्स नोवेल कीज बिहाइंड रिजुवेनेशन कहा जाता है। मारिया पास्कुअल, विक्टर क्वेसाडा और ओविएडो यूनिवर्सिटी की टीम ने ट्यूरिटोप्सिस दोहरनी की जिनोम सिक्वेंसिंग की है। यह जेलीफिश की एकमात्र ज्ञात प्रजाति है, जो एक तरह से अमर है। यह जीव उम्र बढ़ने को उलटने की क्षमता रखता है और वास्तव में तब तक जीवित रहता है जब तक वह चाहता है।

जेलिफिश के डीएनएन की इंसानों से समानता
शोधकर्ताओं ने बताया कि ट्यूरिटोप्सिस डोहरनी एकमात्र ऐसी मेटाज़ोन है जो अपने आप को फिर से बच्चा बना सकता है। मतलब यह जीव खुद का बार-बाक कायाकल्प कर सकता है। यह क्षमता इस जीव के जैविक अमरता की ओर इशारा करता है और उम्र बढ़ने की हमारी समझ को चुनौती देता है। उन्होंने कहा कि हमने रेप्लिकेशन, डीएनए रिपेयर, टेलोमेयर मेंटीनेंस, रेडॉक्स इंवायरमेंट, स्टेम सेल पापुलेशन और इंटरसेल्यूलर कम्यूनिकेशन का पता लगाया है। वे मनुष्यों के समान डीएनए के कुछ हिस्सों को खोजने में भी कामयाब रहे हैं। ऐसे में दशकों बाद इकना इस्तेमाल मनुष्यों में उम्र बढ़ने को उलटने के लिए किया जा सकता है, या कई बीमारियों को ठीक करने में मदद कर सकता है जो हम वर्तमान में नहीं कर सकते हैं।

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