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राजनीति करनी है तो चमड़ी गैंडे जैसी मोटी होनी चाहिए… सुप्रीम कोर्ट ने नेताओं को लेकर क्यों कहा ऐसा?

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजनीति में आने वाले लोगों को आलोचना के लिए तैयार रहना चाहिए। केंद्रीय मंत्री एल.मुरुगन की मानहानि की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को कहा कि नेताओं को आलोचना से ज्यादा चिढ़ना नहीं चाहिए। मुरुगन द्वारा दिसंबर, 2020 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित मानहानि करने वाले बयानों के खिलाफ चेन्नई स्थित मुरासोली ट्रस्ट ने आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

‘राजनीति में अतिसंवेदनशीलता की कोई जगह नहीं’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीति में अतिसंवेदनशीलता की कोई जगह नहीं है, जहां गरमागरम बहस आम बात हो गई है। जस्टिस भूषण आर गवई और केवी विश्वनाथन की बेंच ने मौजूदा राजनीतिक बहस की हकीकत को स्वीकार किया। साथ ही उन्होंने इसकी गिरती गुणवत्ता पर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि आजकल नेताओं के बीच जो बातचीत होती है, उसमें पहले जैसी संयम नहीं है।

‘नेता एक-दूसरे के बारे में क्या नहीं बोलते’
बेंच ने कहा, ‘वो दौर गया जब नेता संयमित रहते थे। आजकल नेता एक-दूसरे के बारे में क्या नहीं बोलते? जब आप राजनीति में आते हैं, तो आपको अपने बारे में कुछ भी सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। आप अतिसंवेदनशील नहीं हो सकते।’

क्या है मामला?
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मुरुगन ने मद्रास हाई कोर्ट के 5 सितंबर 2023 के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए सितंबर 2023 में मुरुगन के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की बेंच के सामने बुधवार को यह मामला सुनवाई के लिए आया। बेंच ने मुरुगन के वकील से पूछा, ‘क्या आप यह बयान देने को तैयार हैं कि आपकी मानहानि करने की कोई मंशा नहीं थी?’

ट्रस्ट की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे राजनीति में शामिल नहीं हैं। बेंच ने ट्रस्ट के वकील से कहा,‘वह (याचिकाकर्ता) यह बयान दे रहे हैं कि उनका इरादा आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।’ वकील ने निर्देश प्राप्त करने के लिए गुरुवार तक का समय मांगा। जस्टिस गवई ने कहा, ‘उन्हें जनता के सामने लड़ाई लड़नी चाहिए। आजकल महाराष्ट्र में कहा जा रहा है कि अगर आपको राजनीति में रहना है तो आपकी चमड़ी गैंडे जैसी मोटी होनी चाहिए।’

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