नई दिल्ली,
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले नौ महीने से चल रहे युद्ध का असर दुनियाभर पर पड़ा है। अमेरिका जैसे पश्चिमी देश रूस के खिलाफ हैं और कई प्रतिबंध लगा चुके हैं। हालांकि, इन प्रतिबंधों की वजह से पश्चिमी देशों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसी बीच, भारत ने बड़ा खेल कर दिया है। दरअसल, भारत अमेरिका को वैक्यूम गैसऑयल (VGO)का एक्सपोर्ट कर रहा है। यह वीजीओ भारत ने रूस से सस्ती दरों पर खरीदा है और अमेरिका को महंगी दरों पर बेच रहा, जिससे मुनाफा भी हो रहा है। कहा जा रहा है कि युद्ध के दौरान पश्चिमी देश रूस की आपूर्ति को बदलने के लिए विकल्प चाहते हैं। अमेरिका और कनाडा ने यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण पर रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। रूसी कच्चे और तेल उत्पादों के आयात पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध क्रमशः 5 दिसंबर और 5 फरवरी को प्रभावी होंगे।
पिछले साल की तुलना सप्लाई कई गुना बढ़ा
पिछले साल की तुलना में इस साल भारत ने अमेरिका को बहुत ही अधिक मात्रा में वैक्यूम गैस ऑयल की आपूर्ति की है. मई 2021 में अमेरिका ने भारत से जहां सिर्फ एक कार्गो VGO खरीदा था. वहीं, इस साल अमेरिका ने अभी तक कई खेप कार्गो VGO खरीद चुका है. यूक्रेन युद्ध से पहले अमेरिका को सबसे ज्यादा VGO रूस निर्यात करता था. यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस कई प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. अमेरिका और कनाडा ने रूस से तेल खरीद पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. वहीं, यूरोपियन यूनियन भी 5 दिसंबर और 5 फरवरी 2023 से रूस से तेल खरीद पर रोक लगाने जा रहा है.
भारत रूस से भारी मात्रा में खरीद रहा है तेल
भारत दुनिया का तेल खरीदने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है. अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बावजूद भारत रूस से भारी मात्रा में रियायत कीमतों के साथ कच्चे तेल खरीद रहा है. भारत इस कच्चे तेल को रिफाइन कर पश्चिमी देशों को महंगे दामों में निर्यात कर रहा है.
भारत रिफायन तेल कर रहा है सप्लाई
चूंकि, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन द्वारा लगाया गया प्रतिबंध रिफाइन तेल पर लागू नहीं होता है. इसलिए अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देश भारत को विकल्प के रूप में देख रहे हैं. वहीं, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने भी रूस से रियायत कीमतों पर तेल खरीदना काफी बढ़ा दिया है. एक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत ने रूस से 7 लाख 93 हजार बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है. जबकि इसी अवधि में पिछले साल आयात सिर्फ 38 हजार बैरल प्रतिदिन था.
