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Friday, May 1, 2026
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क्या झारखंड में बीजेपी को नहीं मिल रहे विधायक, चुनाव आयोग की सिफारिश पर राज्यपाल की इतनी लंबी चुप्पी क्यों?

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रांची/दिल्ली

झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन कुर्सी बचाने के लिए रांची से रायपुर तक की दौड़ लगा रहे हैं। विधायकों को सेफ पर सेफ किए जा रहे हैं ताकि कहीं ‘खेल’ न हो जाए। उधर, राजनीतिक संकट के बीच राज्यपाल रमेश बैस शुक्रवार को एक बार फिर दिल्ली पहुंच गए। सत्तारूढ़ यूपीए विधायकों ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की सिफारिश पर रूख साफ करने का आग्रह किया। राज्यपाल के दिल्ली दौरे ने अटकलों को और तेज कर दिया है क्योंकि गुरुवार को यूपीए प्रतिनिधिमंडल की मीटिंग में राज्यपाल रमेश बैस ने कहा था कि वो जल्द ही सभी संदेहों को दूर कर देंगे।

चुनाव आयोग के लिफाफे में क्या है?
हालांकि, राजभवन के सूत्रों ने कहा कि मेडिकल टेस्ट के लिए एक ‘निजी यात्रा’ पर रमेश बैस गए हैं। लाभ के पद मामले में हेमंत सोरेन को विधानसभा से अयोग्य ठहराने की भाजपा की याचिका के बाद, चुनाव आयोग (ईसी) ने 25 अगस्त को राज्यपाल को अपना फैसला भेजा था। जिसके बाद से राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हुआ। चुनाव आयोग के फैसले को अब तक आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन चर्चा है कि चुनाव आयोग ने एक विधायक के रूप में मुख्यमंत्री की अयोग्यता की सिफारिश की है।

जानबूझकर देरी कर रहे राज्यपाल?
28 अगस्त को एक संयुक्त बयान में यूपीए घटकों (जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी) ने राज्यपाल रमेश बैस पर निर्णय की घोषणा में ‘जानबूझकर देरी’ करके राजनीतिक खरीद-फरोख्त को बढ़ाने आरोप लगाया था। हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का मानना है कि बीजेपी महाराष्ट्र की तरह सरकार गिराने के लिए पार्टी और सहयोगी कांग्रेस के विधायकों को भी अपने साथ लेने की ‘गंभीर’ कोशिश कर सकती है। विधायकों को सुरक्षित पनाह देने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के 32 विधायकों को 30 अगस्त को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक रिसॉर्ट में ले जाया गया। उनमें से चार गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में भाग लेने के लिए लौट आए। कैबिनेट में फैसला लिया गया कि झारखंड विधानसभा का एक विशेष सत्र 5 सितंबर को बुलाया जाएगा। माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन इसमें अपनी बहुमत साबित करेंगे।

मैजिक नंबर तक कैसे पहुंची बीजेपी?
यूपीए ने जोर देकर कहा कि एक विधायक के रूप में सीएम की अयोग्यता सरकार को प्रभावित नहीं करेगी क्योंकि सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन को 81 सदस्यीय सदन में पूर्ण बहुमत हासिल है। सबसे बड़ी पार्टी झामुमो के 30, कांग्रेस के 18 और राजद के एक विधायक हैं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सदन में 26 विधायक हैं। इन सबके बीच हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का मानना है कि बीजेपी महाराष्ट्र की तरह सरकार गिराने के लिए पार्टी और सहयोगी कांग्रेस के विधायकों को भी हथियाने की गंभीर कोशिश (खरीद-फरोख्त) कर सकती है।

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