नई दिल्ली
लेबनान में इजरायली करतब से सिर्फ आतंकी संगठन हिज्बुल्ला नहीं, दुनिया हैरान है। इजरायल ने लेबनान के साथ-साथ सीरिया में आतंकियों के इस्तेमाल किए जाने वाले संचार उपकरणों में विस्फोट से अपने ‘युद्ध क्षमता’ का मुजाहिरा कर दिया। करीब तीन दजर्न आतंकियों के मारे जाने और अन्य सैकड़ों के घायल होने के बाद बिलबिलाए हिज्बुल्ला चीफ हसन नसरल्लाह ने इसे इजरायल की तरफ से थोपा गया युद्ध बताया है। नसरल्लाह और उसे समर्थन दे रहे ईरान ने इजरायल से इसका बदला लेने का ऐलान किया है। हिज्बुल्ला चीफ ने इजरायल को चुनौती दी है कि वो अपने उत्तरी इलाके में नागरिकों को दोबारा बसाने की कोशिशों में कामयाब नहीं हो पाएगा।
नए संघर्ष से भारत के लिए मुश्किल क्या?
उधर, हमास की कमर तोड़ने के बाद इजरायल का पूरा फोकस अपने उत्तरी इलाके पर चला गया है जहां का माहौल अशांत रखने में हिज्बुल्ला लगातार कामयाब रहा है। यही वजह है कि इजरायल ने अब अपने सिक्यॉरिटी अपडेट में लेबनान के दक्षिणी इलाके के विध्वंस को प्राथमिकता दी है। इजरायल अब दो लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है, पहला- अपने बंधक नागरिकों की रिहाई और दूसरा- हिज्बुल्ला को उसकी मांद में भेजना। नई परिस्थितियों में भारत के सामने बड़ी उहापोह की स्थिति पैदा हो रही है जो गाजा वॉर में अब तक राजनय का पलड़ा संतुलित रखने में कामयाब रहा है।
भारत के लिए मुश्किल का सबब है- ईरान। इस पड़ोसी देश ने अगर हिज्बुल्ला के साथ इजरायल के खिलाफ युद्ध स्तर तक के संघर्ष का मन बना लिया तो भारत के लिए संतुलन साध पाना लगातार मुश्किल होता जाएगा। ईरान के संघर्ष में सीधे शामिल होने से युद्ध मैदान में अमेरिका का आना भी लगभग तय हो जाएगा। यह नई दिल्ली के सामने कहीं अधिक जटिल कूटनीतिक चुनौती पेश कर सकता है। इस क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं और काम करते हैं।
पश्चिम एशिया के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक
ये भारतीय अक्सर अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य होते हैं और भारत में अपने परिवारों के पास अच्छा-खासा धन भेजते हैं। नई दिल्ली उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित होगी। भारत के लगभग दो-तिहाई कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पश्चिम एशियाई क्षेत्र से होती है, और कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर प्रभाव देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। 2012 में नई दिल्ली में एक इजरायली राजनयिक की पत्नी को एक बम हमले में निशाना बनाया गया था। भारत उस घटना की पुनरावृत्ति नहीं चाहेगा।
भारत ने अब तक इस क्षेत्र में अस्थिर स्थिति पर कोई बयान नहीं दिया है। अप्रैल में इजरायल पर ईरानी हमले के बाद भारत ने शत्रुता बढ़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और तत्काल तनाव कम करने का आह्वान किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उस समय ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान और इजरायल के विदेश मंत्री इजरायल काट्ज दोनों के साथ स्थिति पर चर्चा की थी। इससे पता चलता है कि दोनों पक्षों ने भारत में जो विश्वास जताया है। हालांकि, युद्ध की संभावित नई स्थिति में नई दिल्ली के पास क्या लाभ है, यह देखा जाना बाकी है।
