पटना
केंद्र में एनडीए की सरकार बन रही है। सहयोगी दलों की इसमें बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसलिए कि भाजपा को पिछले दो चुनावों की तरह इस बार पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। हालांकि केंद्र की पिछली दो सरकारें भी एनडीए की ही रही हैं, लेकिन तब भाजपा के पास अपने ही दम पर पूर्ण बहुमत था। इस बार सहयोगियों की दया पर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन रहे हैं। सहयोगियों में जेडीयू के नीतीश कुमार और टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने कभी नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने की मुहिम चलाई थी। इसलिए नई सरकार के गठन से पहले ही कई तरह की चुनौतियां दस्तक देने लगी हैं।
सहयोगी दल को बड़ा पोर्टफोलियो
सरकार में चार-पांच विभाग सबसे पावरफुल माने जाते हैं। इनमें प्रधानमंत्री को छोड़ कर गृह मंत्रालय, शिक्षा, रक्षा और रेल मंत्रालय काफी महत्वपूर्ण विभाग हैं। कुल बजट का बड़ा हिस्सा इन्हीं विभागों के पास है। इसके अलावा लोकसभा के स्पीकर का पद भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनडीए के दो बड़े घटक दल जेडीयू और टीडीपी की नजर इन विभागों पर है। टीडीपी ने तीन कैबिनेट मंत्री की मांग की है तो साथ में स्पीकर का पद भी मांगा है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक जानकारी किसी ने सार्वजनिक नहीं की है।
जेडीयू को चाहिए तीन बड़े मंत्रालय
यह भी जानकारी मिल रही है कि भाजपा मंत्री पद के लिए किसी सहयोगी दल का दबाव बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यह जानते हुए भी सहयोगियों के बिना सरकार का चलना असंभव है, भाजपा का अड़े रहना उसकी किसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सरकार बनने के पहले ही जिस तरह जेडीयू अग्निवीर योजना को खत्म करने की सलाह दे रहा है, उससे तो यही लगता है कि मंत्री पद के लिए भी वह कोशिश जरूर करेगा। सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक जेडीयू तीन मंत्रालय चाहता है। इनमें गृह, रक्षा, रेल, कृषि और वित्त मंत्रालय शामिल हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नीतीश कुमार खुद रेल मंत्री रह चुके हैं।
अटल सरकार में जार्ज रक्षा मंत्री
जेडीयू के पास बड़े विभाग मांगने के तर्क भी हैं। पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जब एनडीए की सरकार बनी थी तो जेडीयू के जार्ज फर्नांडीज रक्षा मंत्री बनाए गए थे। नीतीश कुमार ने खुद रेलवे मंत्रालय संभाला था। इसी को आधार बना कर जेडीयू इन विभागों की मांग कर रहा है। अब भाजपा को यह तय करना है कि वह इन विभागों को अपने पास रख कर सहयोगियों को नाराज करती है या अटल जी की तरह गठबंधन के साथियों के प्रति उदार भाव रखती है।
बीजेपी के पास प्रमुख मंत्रालय
सूत्र बताते हैं कि भाजपा गृह, रक्षा, रेल और वित्त मंत्रालय किसी भी सूरत में सहयोगियों को नहीं देगी। पिछली सरकार में बहैसियत गृह मंत्री अमित शाह ने लोगों से कई वादे किए हैं। बंगाल में सीएए को कड़ाई से लागू करने, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बनाने, जिहादियों के खिलाफ रड़े कदम उठाने और भ्र,टाचार के खिलाफ जो अभियान छेड़ा है, उसे मुकाम तक पहुंचाने के लिए भाजपा हर हाल में गृह मंत्रालय अपने पास रखेगी। यह भी संभव है कि अमित शाह को ही फिर गृह मंत्रालय का जिम्मा नरेंद्र मोदी दें। यानी गृह मंत्रालय, शिक्षा, रक्षा और रेल मंत्रालय को भाजपा अपने पास रखना चाहेगी। अगर कोई सहयोगी दल ये विभाग मांगता भी है तो उसे मनाने और दूसरे ढंग से कंपन सेट करने की भाजपा कोशिश करेगी।
