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Wednesday, April 1, 2026
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पाकिस्‍तानी पीएम की टीटीपी को धमकी- कोई बातचीत नहीं होगी, चुपचाप सरेंडर कर दो

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इस्लामाबाद

पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवरुल हक काकर ने एक सख्त बयान में कहा है कि आतंकवादी समूहों के सामने एक ही विकल्प है कि वो बिना शर्त सरेंडर कर दें। हक ने कहा कि सरकार किसी भी आतंकी ग्रुप के साथ कोई बातचीत या समझौता नहीं करेगी, ऐसे में वो सरेंडर का रास्ता चुनें। पाक पीएम की ओर से ये तहरीके ताबिलान पाकिस्तान (टीटीपी) के लिए चेतावानी मानी जा रही है। पाकिस्तान के अफगानिस्तान की सीमा से लगते हुए इलाकों में टीटीपी की गतिविधियां बीते कुछ समय में बढ़ गई हैं। खैबर पख्तूनवा और ब्लूचिस्तान में टीटीपी ने लगातार हमले किए हैं, जिसके बाद पाकिस्तान की सरकार और सेना भी सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

आंतरिक मंत्रालय में शहीदों के परिवारों के साथ बातचीत के दौरान सोमवार को कहा, स्टेट उन आतंकवादियों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाएगा, जिन्होंने हिंसा की और निर्दोष नागरिकों की हत्या की। किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हक ने कहा कि स्टेट को ही खास हालात में अपने सुरक्षा बलों के माध्यम से सशस्त्र शक्ति का उपयोग करने का अधिकार है। किसी दूसरे को हथियार उठाने की छूट नहीं हो सकती है। ऐसा करने वालों से कड़ाई से निपटना ही विकल्प है।

टीटीपी ने बीते साल रद्द कर दिया था संघर्षविराम
पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ सरकार और सेना के रुख पर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। राज्य के सभी अंगों को इस बात की स्पष्टता है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्ती से डटे रहना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की भरपाई नहीं कर सकते जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। अगर कोई आतंकवाद की निंदा करना चाहता है, तो उन शहीदों के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए, जिन्होंने आतंकवाद की सबसे बड़ी कीमत चुकाई।

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने एक साल पहले अपना संघर्ष विराम रद्द करने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद टीटीपी ने लगातार पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को निशाना बनाया है। आम लोगों को भी टीटीपी के हमलों का सामना करना पड़ा है। बीते एक साल में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमलों में काफी वृद्धि देखी गई है। इसे देखते हुए कई संगठन और राजनेता अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनावों के दौरान सुरक्षा स्थिति के बारे में भी चिंता जताई है। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना और सरकार टीटीपी को लेकर काफी आक्रामक नजर आ रहे हैं।

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