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बलूचों को गायब करो, मार डालो… नये युग में पहुंची बलूचिस्तान की लड़ाई, न‍िशाने पर पाक सेना

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इस्लामाबाद

पाकिस्तानी सेना की क्रूर रणनीति की वजह से बलूचिस्तान का लगातार खून बह रहा है। पिछले दिनों जाफर एक्सप्रेस हाईजैक और नोशकी जिले में सेना को निशाना बनाकर किए गये हमले में दर्जनों लोगों की मौत हो गई। बलूच लिबरेशन आर्मी ने इन हमलों को अंजाम दिया है। जिसकी मांग है बलूचिस्तान की आजादी। बलूचों की मांग उन लोगों की रिहाई है, जिन्हें पाकिस्तान की सेना ने एक विभत्स ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार किया और फिर गायब करवा दिया। ये दोनों हमले बताते हैं कि बलूच विद्रोहियों को कुचलने के लिए पाकिस्तान की सेना ने जो क्रूर अभियान चलाया है, उसके बावजूद बलूच झुकने वाले नहीं हैं। बलूच लोगों के हक की आवाज को पाकिस्तान की सेना गला घोंट देती है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर गोलियां दागी जाती है, जिससे बलूच लोगों का गुस्सा और भड़कता है और ये आंदोलन और तेजी से आगे बढ़ता है। जिसे देखकर ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की सेना चाह ही नहीं रही है कि बलूचिस्तान संकट खत्म हो। ऐसा लग रहा है कि बलूचों के आंदोलन की आड़ में उनके सफाए का अभियान चल रहा है। बलूचों की मांग है कि बलूचिस्तान की प्रचूर खनिज संपदा में उनका हिस्सा मिले। बलूचिस्तान का विकास हो। बलूचिस्तान में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अच्छी सड़कें बने। लेकिन चश्मदीदों का कहना है कि बलूचिस्तान में कुछ नहीं है। पाकिस्तान की सरकार ने पूरी बलूच आबादी को सजा देने की रणनीति अपनाई है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की खूनी रणनीति
पाकिस्तानी फौज ने 2000 के दशक के बाद से ‘मारो और फेंक दो’ की रणनीति अपनाई है। जिसमें हजारों हजार बलूचों को मार दिया गया, हजारों बलूच युवाओं को गायब कर दिया गया, फर्जी मुठभेड़ का बहाना बनाकर लोगों की हत्याएं की गई और हिरासत में बलूचों को इस तरह से टॉर्चर किया गया, जैसे कसाई बकरे के शरीर से खाल खींच रहा हो। पाकिस्तानी सरकार ने बलूच सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से लेकर छात्रों, शिक्षकों और पत्रकारों को देश के लिए खतरा बताकर गिरफ्तार किया और फिर उन्हें मार डाला। जिसके खिलाफ बलूचों का अंतहीन सशस्त्र आंदोलन शुरू हो गया। पाकिस्तान की सरकार ने बलूचों का विश्वास जीतने, उन्हें उनका वाजिब हक देने की कभी कोशिश नहीं की। जिसका नतीजा ये निकला कि बलूचों ने अंतहीन संघर्ष के रास्ते पर चलने का विकल्प चुना।

बलूच महिलाओं के नेतृत्व में बलूच यकजेहती समिति (BYC) का गठन किया गया, जिसका मकसद शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज को सत्ता तक पहुंचाना था, लेकिन इसके खिलाफ भी पाकिस्तानी प्रतिष्ठान ने क्रूर नीति अपनाई। BYC ने दिसंबर 2023-जनवरी-2024 के दौरान महरंग बलूच के नेतृत्व में बलूचिस्तान के तुर्बत से क्वेटा और क्वेटा से इस्लामाबाद के लिए ‘बलूच नरसंहार के खिलाफ मार्च’ निकाला। लेकिन उनके मार्च को रोकने की हर संभव कोशिश की गई। इनके कार्यकर्ताओं को जान से मारने की धमकियां दी गईं, लोगों को अगवा किया गया और अलग अलग तरह से टॉर्चर किया गया।

हक मांगने के लिए बलूचों की अंतहीन लड़ाई
जुलाई 2024 में बलूचों के एक समूह ने ग्वादर में ‘बलूच राजी मुची’ का आयोजन किया, जिसमें पूरे बलूचिस्तान से लोग जुटे और ये प्रांत के इतिहास का सबसे विशाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन था। इसके अलावा जनवरी 2025 में BYC ने दलबंदिन में ‘बलूच नरसंहार स्मृति दिवस’ मनाया, जिसमें फिर से हजारों लोगों ने भाग लिया। लेकिन पाकिस्तान की कुख्यात सेना ने इनके आंदोलनों को भी कुचल दिया। शुरूआत से ही पाकिस्तान ने बलूचों के अधिकार मांगने के किसी भी संघर्ष पर कई मोर्चों से हमला किया है। बलूचिस्तान में खतरनाक स्तर पर जवानों को तैनात किया गया, बलूचों को चुप कराने और बदनाम करने के लिए शातिर अभियान चलाया, उन्हें आतंकवादी बताया।

उनके शांतिपूर्ण आंदोलनों को आतंकवाद से जोड़ने के लिए पाकिस्तानी मीडिया का इस्तेमाल किया और बलूचों के आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताकर उनकी विश्वसनीयता को बर्बाद करने की कोशिश की। ये पाकिस्तान की बलूच रणनीति का हिस्सा है, जो अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बलूच अब हार मानकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और बलूचिस्तान साल 2025 में, जाफर एक्सप्रेस हाईजैक के साथ ही एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहा है, जिसमें या तो बलूचिस्तान से बलूचों का नामोनिशान मिट जाएगा या फिर बलूचिस्तान, पाकिस्तान से हमेशा के लिए आजाद हो जाएगा।

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