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Saturday, May 9, 2026
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यूपीए अध्यक्ष बनेंगे नीतीश, हवा-हवाई या फिर सच में ऐसा हो सकता है? बगैर कांग्रेस कैसा विपक्षी गठबंधन

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पटना

एक कहावत है ‘गाछे कटहल , ओठे तेल’, विपक्षी एकता का बीड़ा उठाए नीतीश कुमार की मुहिम को अभी स्वीकृति ही किस से मिली है जो वो यूपीए के अध्यक्ष बनेंगे। राजनीतिक गलियारों में उड़ती यह बात सिवाय हवा बाजी के कुछ नहीं। वैसे भी देश में यूपीए की कल्पना बगैर कांग्रेस के फिलहाल तो नहीं ही की जा सकती। यही वजह भी है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद ने साझा रणनीति बनाकर सोनिया गांधी से मुलाकात की। रविवार को मुलाकात के बाद दोनों बाहर निकले और हाथ भी उठाए। हालांकि जो बयान आया वो निराशा भरा था कि सोनिया जी अभी संघटन के चुनाव में व्यस्त हैं ,इसके बाद ही वो कुछ बोलेंगी।

अनगिनत बाधाएं हैं यूपीए बनने में
यह अलग बात है कि राजनीतिक गलियारे में यह बात तैर रही है कि लालू-नीतीश से सोनिया गांधी मिलीं ही नहीं। अगर मिलीं तो इस मुलाकात की तस्वीर बाहर क्यों नहीं आई? इसके पहले तो बीजेपी नेतृत्व को दिखाने के लिए या बीजेपी पर दवाब बनाने के लिए ही सही पर नीतीश ने तमाम विपक्षी नेताओं के साथ-साथ राहुल गांधी से मुलाकात की तस्वीर भी जारी की। पर ऐसा क्या कारण है कि नीतीश ने सोनिया से मुलाकात की तस्वीर नहीं डाली। क्या ये सच है कि मुलाकात हुई ही नहीं, और हुई भी तो नीतीश की शर्तों पर सोनिया राजी नहीं हुईं।

विपक्षी एकता अभी नहीं दिख रही
अभी विपक्षी एकता के मजबूत स्रोत बनने शेष हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने में दो थ्योरी पर काम हो रहा है। एक थ्योरी है कांग्रेस युक्त गंठबंधन । दूसरी थ्योरी है माइनस बीजेपी और माइनस कांग्रेस थर्ड फ्रंट। ऐसा चाहने वाले कई राज्य हैं जिनकी उपज ही कांग्रेस विरोध के साथ शुरू हुई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के सी राव इस मजबूरी के शिकार हैं कि वे कांग्रेस युक्त गंठबंधन के साथ नहीं जा सकते। पश्चिम बंगाल में खुद ममता बनर्जी कांग्रेस और वाम दल के विरुद्ध तृणमूल कांग्रेस को इस अंजाम तक लाई हैं। वापस कांग्रेस के साथ यूपीए में जा कर ममता बनर्जी कांग्रेस को संजीवनी क्यों देंगी।

नया यूपीए बनने की राह में कई रोड़े
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ भी यही फजीहत है कि वे किसी मिशन पर क्यों किसी का साथ दें जब आप पार्टी का खुद ही मिशन है कि 2024 का लोकसभा चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल होगा। ऐसी ही समस्या आंध्र प्रदेश व केरला में भी है। बहरहाल इस मसले पर बीजेपी के पूर्व महासचिव सुधीर शर्मा कहते है कि अभी यह सब अटकलें हैं। पहले खुद नीतीश कुमार को तय कर लेने दीजिए कि उनकी मुहिम में कौन कौन साथ हैं। फिर अध्यक्ष कौन होगा और कन्वेनर कौन होगा,इन जैसे सवालों के लिए जगह होगी। अभी तक खुल कर आरजेडी और जेडीयू के अलावा कोई दल शामिल हुआ भी है क्या ?

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