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‘चीन के साथ ताइवान के विलय को कोई नहीं रोक सकता’, नए साल पर शी जिनपिंग का बड़ा बयान

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बीजिंग,

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2.3 करोड़ लोगों के आबादी वाले द्वीप राष्ट्र ताइवान के स्वतंत्रता समर्थक ताकतों को स्पष्ट चेतावनी दी है. उन्होंने मंगलवार (31 दिसंबर) को अपने न्यू ईयर स्पीच में कहा कि चीन के साथ ताइवान के विलय को कोई नहीं रोक सकता. चीन ने पिछले एक वर्ष के दौरान अपनी सीमाओं के करीब युद्धपोत भेजकर और लगभग हर दिन हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करके ताइवान पर सैन्य दबाव बढ़ा दिया है. ताइवान के अधिकारियों ने इसे द्वीप पर अपनी सैन्य उपस्थिति को सामान्य करने के चीन का प्रयास बताया है.

लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को चीन अपना क्षेत्र मानता है. जबकि ताइवान ने बीजिंग के ऐसे दावों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा है कि केवल ताइवान के लोग ही उसका भविष्य तय कर सकते हैं और बीजिंग को इस फैसले का सम्मान करना चाहिए. टेलीविजन पर प्रसारित भाषण में शी जिनपिंग ने कहा, ‘ताइवान और चीन के लोग एक ही परिवार हैं. कोई भी हमारे पारिवारिक बंधनों को नहीं तोड़ सकता है, और कोई भी चीन के साथ ताइवान के एकीकरण को रोक नहीं सकता.’ पिछले साल भी, शी ने अपने नए साल के भाषण में कहा था कि चीन के साथ ताइवान का एकीकीरण अपरिहार्य है और दोनों पक्षों के लोगों को ‘इस सामान्य उद्देश्य की भावना से बंधे रहना चाहिए और चीन राष्ट्र के उदय पर गौरवान्वित होना चाहिए.’

पिछले कुछ वर्षों में चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ गया है, खासकर लाई चिंग-ते के मई 2024 में ताइवान के राष्ट्रपति बनने के बाद. लाई चिंग-ते को चीन ‘अलगाववादी’ नेता मानता है, जो स्वतंत्र एवं संप्रभु ताइवान की वकालत करते हैं. चीन साफ तौर पर कहता रहा है कि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लेने के लिए बल प्रयोग से पीछे नहीं हटेगा. राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के सत्ता में आने के बाद से चीन तीन दौर का सैन्य अभ्यास कर चुका है. ताइवान के अधिकारियों के अनुसार, चीन इस महीने की शुरुआत में अंतिम युद्धाभ्यास काफी बड़े पैमाने पर हुआ. हालांकि, बीजिंग की ओर से आधिकारिक तौर पर युद्धाभ्यास की पुष्टि नहीं की गई. बता दें कि अमेरिका समेत कई देश ताइवान की स्वतंत्रता और संप्रभुता का समर्थन करते हैं, भारत भी उनमें शामिल है.

चीन लगभग हर रोज द्वीप के निकट अपने पोत और सैन्य विमान भेजता है. बीते दिनों अमेरिका की ओर से ताइवान को सैन्य सहायता प्रदान करने पर चीन ने आपत्ति जताई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने घोषणा की थी कि उन्होंने ताइवान को 5710 लाख डॉलर की सैन्य सहायता की है. उन्होंने हथियारों और सैन्य उपकरणों के जरिए किसी विदेशी राज्य को सहायता आवंटित करने के अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार के तहत यह कदम उठाया था. बाइडेन के इस फैसले का विरोध करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘अमेरिका ने एक बार फिर चीन के ताइवान क्षेत्र को सैन्य सहायता और हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है. यह वन-चाइना पॉलिसी और चीन-अमेरिका के बीच तीन संयुक्त विज्ञप्तियों, विशेष रूप से 17 अगस्त, 1982 की विज्ञप्ति का गंभीर उल्लंघन ​है.’

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