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गंगाजल छिड़कने वाले ज्ञानदेव आहूजा की अब खैर नहीं! नोटिस के जवाब में माफी नहीं मांगने पर अब पार्टी का बड़ा एक्शन

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जयपुर

प्रदेश भाजपा में इन दिनों उथल पुथल मची हुई है। पिछले दिनों पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्ञानदेव आहूजा मंदिर में गंगाजल छिड़कर शुद्धीकरण किए जाने के मामले में पार्टी प्रदेशाध्यक्ष ने उन्हें नोटिस जारी करके तीन दिन में जवाब देने को कहा था। आहूजा ने नोटिस का जवाब तो भेज दिया लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी। गंगाजल छिड़कने के मामले में आहूजा का कहना है कि वे तो दलितों के नेता हैं। उन्होंने दलितों का विरोध करने के रूप में गंगाजल नहीं छिड़का था। जब उन्होंने कोई गलती की ही नहीं तो माफी किस बात की। आहूजा के इस जवाब पर पार्टी में और घमासान होना तय है। इस मामले में पार्टी उन्हें निष्कासित भी कर सकती है। निलंबन की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है और अब निष्कासन की तलवार लटक गई है।

ना कभी माफी मांगी, ना कभी मागूंगा – आहूजा
ज्ञानदेव आहूजा का कहना है कि उन्होंने कभी किसी से माफी नहीं मांगी और भविष्य में भी वे माफी नहीं मागेंगे। जिन बिंदुओं पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उसका जवाब उन्होंने पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी को भेज दिया है। आहूजा का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया जिसकी वजह उन्हें माफी मांगनी पड़े। जो आरोप लगाए गए हैं। वे सभी बेबुनियाद हैं उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन में हमेशा दलितों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है और आगे भी करते रहेंगे। दलितों के सम्मान के लिए वे हमेशा खड़े रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे। दलितों की आवाज बुलंद करने के कारण ही वे तीन बार विधायक रहे थे।

जानिए कैसे विवादों में आ गए थे आहूजा
पिछले दिनों नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली एक मंदिर में गए थे। इसके बाद ज्ञानदेव आहूजा ने बयान जारी किया कि मंदिर अशुद्ध हो गया है, इसलिए वे गंगाजल छिड़क कर शुद्धीकरण करेंगे। अगले दिन वे मंदिर गए और गंगाजल छिड़का था। चूंकि कांग्रेस के नेता टीकाराम जुली दलित वर्ग से हैं। ऐसे में कांग्रेस ने अपने अहमदाबाद के राष्ट्रीय अधिवेशन में इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए दलित अपमान के साथ जोड़ दिया था। ज्ञानदेव आहूजा को दलित विरोधी नेता करार देते हुए उनके द्वारा शुद्धीकरण प्रकरण को लेकर विरोध किया। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन किए गए थे। भाजपा ने भी आहूजा की इस हरकत को गंभीरता से लिया और कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था।

अब प्रदेशाध्यक्ष के फैसले पर टिकी है निगाहें
ज्ञानदेव आहूजा ने नोटिस का जवाब तो दे दिया लेकिन पार्टी उनके जवाब से संतुष्ठ हो, ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है। जिस तरह का रवैया आहूजा का रहा। उसे देखते हुए लगता है कि पार्टी उनके खिलाफ एक्शन ले सकती है। अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ प्रदेश प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार विमर्श करके आगे की कार्रवाई करेंगे। राजनैतिक गलियारों से ऐसी जानकारी आ रही है कि पार्टी उन्हें निष्कासित कर सकती है। इस प्रकरण पर अब सबकी निगाहें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के फैसले पर टिकी है।

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