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ABVP की तिरंगा रैली में स्कूली बच्चों को भेजने का ऑर्डर देकर घिरे उमर अब्दुल्ला

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जम्मू

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की तिरंगा रैली में स्कूली बच्चों को भेजने का ऑर्डर देकर विवादों में फंस गए है। अब इस मामले में राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने आरोप लगाया है कि सत्ताधीन एनसी सरकार छात्रों को एबीवीपी के ‘वैचारिक कार्यक्रम’ में शामिल होने के लिए मजबूर कर रही है। महबूबा मुफ्ती की पीडीपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर ‘शिक्षा को प्रोपगैंडा के रूप में’ इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। पीडीपी के अलावा, पुंछ में आदिवासी छात्रों के एक प्रमुख संगठन ने भी इस घटना की जांच की मांग की है।

उमर सरकार पर गंभीर सवाल
ABVP की तिरंगा रैली को लेकर जम्मू-कश्मीर में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी गतिविधियों तथा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ तालमेल के लिए उमर सरकार को आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है।

बढ़ता जा रहा है विवाद
अब इस विवाद ने बढ़ता ही जा रहा है, पुंछ के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पुंछ के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को लिखा गया एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बुधवार को भेजे गए इस पत्र में विभाग को गुरुवार को एबीवीपी द्वारा आयोजित तिरंगा रैली में दो टीचर के साथ 40 से 50 छात्रों को भेजने के निर्देश दिए गए है।

पीडीपी ने खोला मोर्चा
पीडीपी ने जम्मू-कश्मीर सरकार पर छात्रों को तिरंगा रैली में जबरन भेजने का आरोप लगाया है।उन्होंने इसको अस्वीकार्य करार दिया है। पार्टी ने कहा कि शिक्षा को आरएसएस से संबद्ध एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के प्रचार का माध्यम बन रहा है। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा कि जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विभाग ने पुंछ में आरएसएस से जुड़े एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) द्वारा आयोजित तिरंगा रैली में निजी और सरकारी स्कूलों के बच्चों को भाग लेने के लिए मजबूर किया। छात्रों को विचारधारात्मक आयोजनों में भेजना शिक्षा का दुरुपयोग है और यह स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।

जानिए क्या है पूरा मामला
आपको बता दें कि गुरुवार 23 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में एबीवीपी द्वारा आयोजित ‘तिरंगा रैली’ में कई छात्रों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। इस रैली से एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जिले के शिक्षा विभाग को इसमें छात्रों और शिक्षकों को शामिल होने के लिए आदेश जारी किया था।

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