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Wednesday, April 1, 2026
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PAK के लोग मान रहे, बंटवारा सबसे बड़ी गलती, वहां सब दुखी- भागवत

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भोपाल

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि आजादी के सात दशक से अधिक समय के बाद भी पाकिस्तान के लोग खुश नहीं हैं। अब वे मानते हैं कि भारत का विभाजन एक गलती थी। वह किशोर क्रांतिकारी हेमू कालाणी की जयंती के अवसर पर भोपाल में सिंधी समाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से सिंधी समाज के लोग शामिल हुए। भागवत ने कहा कि अखंड भारत सत्य है, खंडित भारत दु:स्वप्न है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत से अलग होने के सात दशक बाद भी पाकिस्तान में दुख है, जबकि भारत में सुख है। अमर बलिदानी हेमू कालाणी की जयंती पर यहां आयोजित समारोह में सिंधी समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि हमको नया भारत बसाना है। भारत खंडित हो गया। आज जिसको हम पाकिस्तान कहते हैं, उसके लोग कह रहे हैं कि गलती हो गई। अपनी हठधर्मिता के कारण भारत से अलग हो गए, संस्कृति से अलग हो गए। क्या वे सुख में हैं?

पाकिस्तान में है दुख
उन्होंने आगे कहा कि यहां (भारत में) सुख है और वहां (पाकिस्तान में) दुख है। मोहन भागवत ने कहा कि जो सही है, वह टिकता है। जो गलत है, वह आता है और जाता है। भागवत ने कहा कि सिंधी समुदाय सब कुछ गंवाकर भी शरणार्थी नहीं बना लेकिन उसने पुरुषार्थी बनकर दिखा दिया। शहीद हेमू के नाम के साथ सिंध का नाम जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सिंधी समुदाय का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है लेकिन इसका उल्लेख कम होता है।

आरएसएस चीफ कहा कि सिंधी समुदाय ने भारत नहीं छोड़ा था, वे भारत से भारत में ही आए थे। उन्होंने कहा कि हमने तो भारत बसा लिया लेकिन वास्तव में राष्ट्र खंडित हो गया। आज भी उस विभाजन को कृत्रिम मानते हुए सिंध के साथ मन से लोग जुड़े हैं। सिंधु नदी के प्रदेश सिंध से भारत का जुड़ाव रहेगा। भागवत ने कहा कि आज भी अखंड भारत को सत्य और खंडित भारत को दु:स्वप्न माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सिंधी समुदाय दोनों तरफ के भारत को जानता है। आदिकाल से सिंध की परंपराओं को अपनाया गया। भारत ऐसा हो जो संपूर्ण विश्व को सुख-शांति देने का कार्य करें। तमाम उतार-चढ़ाव आएंगे, लेकिन हम मिटेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि हम विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। भागवत ने डॉ. हेडगेवार और अन्य विचारकों के माध्यम से संपूर्ण दुनिया को दिखाए गए कल्याण के मार्ग का भी उल्लेख किया।

सनातन पर दिया भागवत ने ये बयान
वैसे हाल ही में सनातन को लेकर भी मोहन भागवत ने एक बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म को किसी को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. सनातन समय की कसौटी पर खरा साबित हुआ है. बाकी सब बदल जाता है. यह पहले भी शुरू हुआ था, आज भी है और कल भी रहेगा. हमें अपने आचरण से लोगों को ‘सनातन’ समझाना होगा. इससे पहले उन्होंने जनवरी की शुरुआत में नागपुर में कहा था कि हमें अपने धर्म पर दृढ़ रहना चाहिए, भले ही इसके लिए हमें मरना ही क्यों ना पड़े. उन्होंने कहा था कि सनातक धर्म ही हिंदू राष्ट्र है. जब जब हिंदू राष्ट्र की उन्नति होती है, वो धर्म के उन्नति के लिए होती है. अब भगवान की इच्छा है कि सनातन धर्म का उत्थान हो. ऐसे में हिंदुस्तान का उत्थान निश्चित है.

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