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इंदौर: बच्चों से भीख मंगवा रही थी महिला, मानवाधिकार आयोग ने MP सरकार को दिया नोटिस

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इंदौर:

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को एक नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह नोटिस मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर जारी किया है। कुछ दिन पहले एक महिला को भीख मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। महिला ने भीख मांगकर 45 दिनों में 2.5 लाख रुपए कमाए थे। मानवाधिकार आयोग ने महिला द्वारा बार-बार किए गए अपराधों पर चिंता व्यक्त की है। साथ ही कहा है कि अधिकारियों की ओर से निगरानी में कमी है।

महिला भीख मांगने के लिए छोटे बच्चों का इस्तेमाल भीख मंगवाने के लिए करती थी। खबरें सामने आने के बाद मानवाधिकार आयोग ने उन छोटे बच्चों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला है। बच्चे अपने ही परिवार के सदस्यों द्वारा शिकार बनाए जा रहे हैं। बच्चों को उनकी शिक्षा और भविष्य के करियर पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए, उन्हें अनैतिक कार्यों में धकेला जा रहा है।

NHRC ने मुख्य सचिव से चार सप्ताह के भीतर घटना पर पर जवाब मांगा है। दरअसल, 13 फरवरी को हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी कि पांच बच्चों की मां इंद्रा बाई उनसे भीख मंगवा रहा है। इस आरोप में इंद्रा बाई को गिरफ्तार किया गया था।

उसने यह कबूल किया था कि इंदौर के लव कुश चौक पर 45 दिनों में भीख मांगकर 2.5 लाख रुपये कमाए। लव कुश चौक उज्जैन में महाकाल मंदिर जाने वाले रास्ते पर स्थित है। यह पता चला कि इंद्रा बाई और उसके पति के पास राजस्थान में संपत्ति है। इसमें जमीन का एक प्लॉट, दो मंजिला मकान, एक मोटरसाइकिल और स्मार्टफोन शामिल हैं।

वहीं, मानवाधिकार आयोग ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं, इस पर सरकार से जवाब मांगा है। इसके अलावे, किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार महिला के बच्चों को देखभाल के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभी तक क्या कार्रवाई की गई है, उसके बारे में सूचित करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि इंदौर नगर निगम के सहयोग से एक NGO ने बच्चे को बचाया है, जो भिखारियों के पुनर्वास की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया है कि इंदौर के 70,000 भिखारियों में से 50% बच्चे हैं। ये बच्चे सामूहिक रूप से सालाना 20 करोड़ रुपए से अधिक कमाते हैं।

NHRC ने यह भी पूछा है कि क्या राज्य सरकार ने भिखारियों की संख्या, उनके खिलाफ की गई कार्रवाइयों और उनके पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों का पता लगाने के लिए कोई हालिया सर्वेक्षण किया है। हालांकि कोई राष्ट्रीय भीख विरोधी कानून नहीं है, लेकिन विभिन्न राज्यों ने इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए कानून बनाए हैं।

मध्य प्रदेश में भी भीक्षा वृत्ति निवारण अधिनियम, 1973′ भिखारियों और उनके आश्रितों को प्रमाणित संस्थानों में हिरासत में लेने, प्रशिक्षण देने और रोजगार देने की अनुमति देता है। साथ ही, अपराधियों की हिरासत, मुकदमा और सजा का भी प्रावधान है। NHRC ने बच्चों को असामाजिक तत्वों का शिकार होने से बचाने के लिए इस कानून को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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