नई दिल्ली
एक खेल का मैदान ही तो है, जहां एक ही साथ हर तरह के इमोशन देखने को मिलते हैं। हारने वाला गम में डूब जाता है तो जीतने वाली टीम या खिलाड़ी जश्न में मनाता है। अब भारत के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी एचएस प्रणय को ही ले लीजिए। उन्होंने एशियन गेम्स के बैडमिंटन के सिंगल्स के क्वॉर्टर फाइनल में मलेशिया के ली झी जिया को 3 गेम तक चले धांसू मैच में जब हराया तो जश्न देखते बन रहा था। खुशी के मारे उन्होंने टी-शर्ट निकालकर फेंक दिया, बिल्कुल सौरव गांगुली के अंदाज में, और फिर कोर्ट की दाईं ओर खड़े अपने महागुरु गोपीचंद के पास पहुंचे। यहां गुरु ने शिष्य को अपने जिगर से लगा लिया और उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।
एचएस प्रणय ने 5 अक्टूबर (गुरुवार) को इतिहास रचते हुए 1982 के बाद से एशियाई खेलों में बैडमिंटन पुरुष एकल में भारत के लिए पहला पदक हासिल किया। उन्होंने 78 मिनट तक चले क्वॉर्टर फाइनल में ली जी जिया को 21-16, 21-23, 22-20 से हराया। मैच पर कब्जा करने के तुरंत बाद उन्होंने अपने भावुक कोच पुलेला गोपीचंद को गले लगाने से पहले मुट्ठियां मारीं और अपनी शर्ट उतार दी।
वह पूरे मैच के दौरान चोट से जूझ रहे थे और उन्हें मेडिकल टीम की जरूरत थी। नॉकआउट गेम उनके लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। जहां प्रणय ने 5-11 से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में विपक्षी ने जीत हासिल की, लेकिन यह भी उसके लिए आसान नहीं था। प्रणय ने आखिरी दम तक लड़ाई लड़ी थी। इसके बाद तीसरा गेम विध्वंसक हुआ। एक-एक पॉइंट के लिए दोनों शटलरों में खूब भिड़ंत हुई। हालांकि आखिरी में गजब की रैली जीतते हुए प्रणय ने मैदान मार लिया।
इतिहास रचने के बाद एचएस प्रणय बहुत खुश थे और उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करने के लिए एक्स डॉट कॉम पर पोस्ट किया। जश्न के दौरान टी शर्ट उतारने की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- आज दर्द का जुनून से मुकाबला हुआ और जुनून हावी हो गया। अगला पड़ाव एशियाई खेल सेमीफाइनल। मैच के बाद प्रणय ने कहा- मैं बिल्कुल भी ऐसी स्थिति में नहीं हूं जहां मैं कह सकूं कि मैं 80 प्रतिशत सही हूं। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा कुछ करने के लिए मैं खुद को बहुत सारा श्रेय दूंगा। मुझे लगता है कि लड़ने की इच्छा हमेशा से थी तो, मुझे लगता है कि इसका फायदा मिला।
उन्होंने आगे कहा- इसका मुझ पर असर पड़ रहा है, लेकिन खेल ऐसा ही है। आप हर दिन 100 प्रतिशत नहीं हो सकते। लेकिन आपको 60 या 70 प्रतिशत होने पर भी मैच जीतना सीखना होगा। मुझे लगता है कि आज उन दिनों में से एक था जब मुझे ऐसा करना पड़ा।
