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Wednesday, April 1, 2026
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गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर नहीं निकालने देंगे प्रिंस सलमान, डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सऊदी ने खींची तलवार!

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रियाद

डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी के पुननिर्माण के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। जिसके तहत फिलिस्तीनियों को बाहर निकालने की घोषणा की है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव ने अरब देशों को भड़का दिया है। मिस्र और जॉर्डन पहले ही ट्रंप के प्लान को खारिज कर चुके हैं। वहीं सऊदी अरब भी कह चुका है कि फिलिस्तीनियों को लेकर वो किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। वहीं अब कम से कम 10 सूत्रों ने बताया है कि सऊदी अरब, गाजा के भविष्य को लेकर एक योजना विकसित करने के लिए अरब देशों की कोशिशों का नेतृत्व कर रहा है। इसका मतलब ये है कि सऊदी अरब, गाजा पट्टी में डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव को रोकने के लिए एक समूह का नेतृत्व कर रहा है। यानि गाजा पट्टी में अब सऊदी के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने खड़े हो गये हैं।

सूत्रों ने बताया है कि इस महीने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक बैठक होने वाली है। जिसमें सऊदी अरब के साथ साथ मिस्र, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात के साथ साथ कई और अरब देशों के अधिकारी हिस्सा लेने वाले हैं। इस बैठक में गाजा पट्टी को लेकर नये मसौदे पर चर्चा की जाएगी। मामले की जानकारी रखने वाले पांच अधिकारियों ने बताया है कि प्रस्तावों में खाड़ी देशों के नेतृत्व में गाजा के पुनर्निर्माण में लगने वाले फंड और उस सौदे से हमास को बाहर रखने के प्रस्ताव पर बातचीत होने की संभावना है।

गाजा पर डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव होगा खारिज?
सऊदी अरब और उसके अरब सहयोगी देश डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव से स्तब्ध हैं कि गाजा पर अमेरिका का कंट्रोल होगा और फिलिस्तीनियों को बाहर निकाला जाएगा। अरब देशों का मानना है कि इस प्रस्ताव से फिलिस्तीनी हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। उन्हें जॉर्डन और मिस्र में विस्थापित किया जाएगा और फिर वो कभी गाजा वापस नहीं लौट पाएंगे। मिस्र और गाजा ने दो टूक कहा है कि इस प्रस्ताव से अरब देशों में अस्थिरता आएगी। इस बाबत जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला ने डोनाल्ड ट्रंप से पिछले हफ्ते मुलाकात भी की थी। वहीं मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही है।

सूत्रों ने खुलासा किया है कि सऊदी अरब में डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव से निराशा और बढ़ गई है। सऊदी अरब का मानना है कि ये प्रस्ताव उसके फिलिस्तीनियों के लिए अलग राज्य बनाने की मांग को ही खत्म कर देगा। इसके अलाव इजरायल के साथ उसके संबंधों के सामान्य होने की दिशा में जो कुछ डेवलपमेंट हुआ था, उसके भी खिलाफ है। रॉयटर्स ने सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन और अन्य जगहों पर 15 स्रोतों से बात की है, ताकि अरब राज्यों की तरफ से जल्दबाजी में जो नया मसौदा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, उसके आधार पर एक तस्वीर बनाई जा सके। अरब देशों की कोशिश गाजा पर नया प्रस्ताव बनाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को भेजना है, ताकि इसे डोनाल्ड ट्रंप का ही प्रस्ताव बताया जा सके। हालांकि बात करने वाले सभी स्रोतों ने अपनी पहचान बताने से इनकार कर दिया है, क्योंकि ये काफी संवेदनशील विषय है।

गाजा पट्टी पर मिस्र का प्रस्ताव क्या है?
एक अरब सरकारी सूत्र ने कहा है कि गाजा के भविष्य के लिए कम से कम चार प्रस्ताव पहले ही तैयार किए जा चुके हैं, लेकिन अब मिस्र का एक प्रस्ताव डोनाल्ड ट्रंप के विचार के विकल्प के लिए अरबों की कोशिशों के केन्द्र में आ रहा है। मिस्र के तीन सुरक्षा सूत्रों ने बताया है कि मिस्र के प्रस्ताव में गाजा पर हमास की भागीदारी के बिना शासन करने के लिए एक राष्ट्रीय फिलिस्तीनी समिति का गठन का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा विदेशों में फिलिस्तीनियों को विस्थापित किए बिना पुनर्निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी और दो-राज्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ना शामिल है। अरब सरकार के सूत्र ने बताया है कि सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और फिलिस्तीनी प्रतिनिधि 27 फरवरी को निर्धारित अरब शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाने से पहले रियाद में योजना की समीक्षा और चर्चा करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

जॉर्डन के एक अधिकारी ने कहा है कि “हम अमेरिकियों को बता रहे हैं कि हमारे पास एक योजना है, जो कारगर है। एमबीएस (प्रिंस सलमान) के साथ हमारी बैठक महत्वपूर्ण होने जा रही है। वह नेतृत्व संभाल रहे हैं।” क्राउन प्रिंस का पहले ट्रंप प्रशासन के साथ मधुर काफी संबंध था और नए ट्रंप युग के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अरब संबंधों के लिए उनका महत्व बढ़ रहा है। लंबे समय से संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सऊदी अरब एक प्रमुख क्षेत्रीय भागीदार रहा है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप और क्राउन प्रिंस के बीच भी काफी अच्छे संबंध रहे हैं। लिहाजा अरब अधिकारी इस कोशिश में हैं कि दोनों नेताओं के बीच के अच्छे संबंध का फायदा गाजा के पुननिर्माण में उठाया जा सके।

 

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