बेंगलुरु
कर्नाटक में सरकार के एक विज्ञापन को लेकर बवाल मचा हुआ है। दरअसल विज्ञापन में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को उजागर करने वाली तस्वीर से नेहरू जी की तस्वीर गायब थी। इसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है। वहीं भाजपा का यह कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया किभारत के पहले पीएम प्रभावी रूप से विभाजन का कारण बने थे। प्रदेश भाजपा महासचिव और एमएलसी एन रविकुमार ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को आजादी मिलने के बाद कांग्रेस को भंग करने की सलाह दी थी। लेकिन नेहरू ने गांधीजी की एक नहीं सुनी।इसलिए उनकी तस्वीर को जानबूझकर विज्ञापन से बाहर रखा गया था। रविकुमार ने कांग्रेस पर पिछले हफ्ते बेंगलुरु के हडसन सर्कल में एक पोस्टर लगाकर ‘हिंदू विरोधी’ टीपू सुल्तान का महिमामंडन करने का आरोप भी लगाया, जिसे बाद में कट्टर लोगों ने निशाना बनाया। वहीं विवाद को बढ़ता देख सीएम बसवराज बोम्मई ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में नेहरू के योगदान को स्वीकार किया।
बोम्मई ने कांग्रेस पर आंबेडकर का ‘अपमान’ करने का लगाया आरोप
कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने राज्य सरकार के एक विज्ञापन को मुद्दा बनाकर हंगामा करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की। विपक्ष पर पलटवार करते हुए बोम्मई ने कांग्रेस पर आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आंबेडकर को उनका उचित सम्मान क्यों नहीं दिया गया? कांग्रेस ने उन्हें संसद में प्रवेश करने की अनुमति तक नहीं दी। जब उनकी मृत्यु हुई, तब सरकार ने अंतिम विश्राम स्थल तक प्रदान नहीं किया। आंबेडकर के स्मारकों पर काम अधूरा रह गया। कांतीरवा इंडोर स्टेडियम में सीएम ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि 65 साल तक आपने नेहरू के नाम पर देश चलाया। हम नेहरू या उनके काम को नहीं भूले हैं। हम उनके लिए बहुत सम्मान करते हैं। इसके साथ ही कहा कि (एक स्केच के हिस्से के रूप में) उनकी तस्वीर विज्ञापन में है ।
विधानसभा चुनावों में दिख सकता है असर
सूत्रों ने कहा कि नेहरू की तस्वीर को लेकर छिड़े विवाद जैसी चीजों का असर 2023 के विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। इस तरह के मुद्दे भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जो एक संभावित राजनीति को लेकर माहौल बनाने में लगी है, उनके संगठनों के भीतर की खामियों से ध्यान हटा सकता है। राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री ने कहा कि “इस मुद्दे ने जरूर कांग्रेस को एक एकीकृत आधार प्रदान किया है। भाजपा को अपनी ओर से मोदी के ‘सब का साथ, सब का विकास और सब का विश्वास’ के बयान से पीछे हटने की जरूरत है। बीजेपी को चाहिए कि वह समावेशिता लाकर और विशिष्टता का प्रचार न करे।”
भाजपा नेता रविकुमार की टिप्पणी विपक्षी नेता सिद्धारमैया द्वारा नेहरू के “अपमान” के लिए बोम्मई से माफी मांगने की मांग के बाद आई है। रविकुमार ने कहा, “क्या सावरकर को कैद नहीं किया गया था? नेहरू से भी बड़ी सजा उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के काला पानी में जेल में बंद कर दी गई थी, जबकि नेहरू को जेल में बंद कर दिया गया था, लेकिन उन्हें घर का बना हुआ खाना मिलता था। यह कैसे सही है कि आप एक को याद कर सकते हैं और दूसरे को भूल जाएं”
