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सिंधिया ‘विरोधी’ रामनिवास रावत ने प्रियदर्शनी राजे सिंधिया के छुए पैर, कभी हार के लिए ठहराया था जिम्मेदार

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ग्वालियर

ग्वालियर में माधवराव सिंधिया की 80वीं जयंती पर पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया के पैर छूते दिखे। इस तस्वीर ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। रावत पहले कांग्रेस में थे फिर पलटी मारकर बीजेपी में शामिल हुए। इसमें नरेंद्र सिंह तोमर की भूमिका रही। चुनाव हारने के बाद सिंधिया परिवार से उनकी नजदीकी पर सवाल उठे थे। इस घटना से राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।

स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की जयंती पर आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम से आए इस नजारे ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। तस्वीर में पूर्व मंत्री रामनिवास रावत प्रियदर्शनी राजे सिंधिया के पैर छूते नजर आ रहे हैं। इस मौके पर बीजेपी के कई दिग्गज नेता भी मौजूद थे। इस तस्वीर के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कई लोग इसे रावत का सिंधिया परिवार के प्रति सम्मान का प्रदर्शन मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं।

हार के लिए सिंधिया परिवार को ठहराया जिम्मेदार
रामनिवास रावत का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद उन्हें मंत्री पद मिला। लेकिन बाद में चुनाव हार गए। इस हार के लिए सिंधिया परिवार से दूरी को जिम्मेदार ठहराया गया। रामनिवास रावत ने कहा था कि अगर सिंधिया चुनाव प्रचार में आते, तो नतीजे कुछ और होते। इस बारे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि चुनाव में प्रचार के लिए अगर मुझे बुलाया गया होता तो मैं जरूर जाता। इस बयान ने और भी आग में घी डाल दिया था।

मंत्री पद के बाद भी हारे चुनाव
रामनिवास रावत लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और सिंधिया परिवार के करीबी माने जाते थे। भारतीय जनता पार्टी में आने में नरेंद्र सिंह तोमर ने अहम भूमिका निभाई। मंत्री पद मिलने के बाद भी चुनाव हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद सिंधिया परिवार से उनकी नजदीकी पर सवाल उठने लगे। रामनिवास रावत की नाराजगी भी खुलकर दिखने लगी।

विरोध के बाद बढ़ी थी दूरी
विजयपुर से लंबे समय तक विधायक रहे रावत का BJP में आना एक बड़ा राजनीतिक कदम था। लेकिन चुनाव हार ने उनके राजनीतिक करियर को झटका दिया। इस हार के बाद सिंधिया परिवार से उनकी दूरी और बढ़ गई। इस तस्वीर ने एक बार फिर पुराने सवालों को हवा दे दी है। इस घटना के बाद अब सबकी निगाहें भाजपा और रामनिवास रावत की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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