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आतंकी कसाब को भी फेयर ट्रायल मिला था, सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक से जुडे़ मामले पर क्यों कही ये बात

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि आतंकी अजमल कसाब को भी देश में फेयर ट्रायल दिया गया था। शीर्ष अदालत ने जेल में बंद कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक से जुड़ी याचिका पर यह बात कही। सीबीआई ने मलिक को ट्रायल कोर्ट में जेल से लाकर पेश करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मलिक के खिलाफ 1989 में 4 आईएएफ बल की हत्या का आरोप है।

इस मामले के ट्रायल में मलिक की पेशी के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया था जिसे सीबीआई ने चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने अपनी दलील में कहा है कि मलिक के फिजिकल पेशी से सुरक्षा का मुद्दा जुड़ा हुआ है। सीबीआई की ओर से तुषार मेहता ने कहा कि मलिक को जम्मू के ट्रायल कोर्ट में ले जाने में सुरक्षा को लेकर खतरा है। इसी कारण उन्हें ले जाना संभव नहीं हो सकता है। इस मामले में गवाहों की सुरक्षा भी गंभीर मसला है।

ऑनलाइन जिरह को लेकर सवाल
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मलिक ट्रिक्स खेल रहे हैं। वहा चाह रहे हैं कि बिना वकील कोर्ट में पेश हों। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मलिक कोई साधारण आरोपी नहीं हैं। इस दौरान जस्टिस एएस ओका ने सवाल किया कि आखिर ऑनलाइन कैसे किसी मामले में जिरह हो सकती है? सॉलिसिटर जनरल ने इस पर कहा कि मलिक कोई साधारण आरोपी नहीं हैं वह कई बार पाकिस्तान जा चुके हैं वह हाफिज सईद से मिल चुके हैं।

एसजी ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन के फाउंडर हाफिज सईद के साथ मलिक की तस्वीरें हैं। वह आतंकी सईद से मिल चुके हैं। ऐसे मामले में किताबी तरीके से आगे नहीं बढ़ा जा सकता है। इस दौरान जस्टिस ओका ने कहा कि हमारे देश में फेयर ट्रायल अजमल कसाब को भी मिला था।

गवाहों को सुरक्षा मिलनी चाहिए
गौरतलब है कि कसाब मुंबई अटैक मामले में आरोपी था जिसे फांसी की सजा दी जा चुकी है। जस्टिस ओका से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि गवाहों को सुरक्षा चाहिए एक गवाह मारा जा चुका है। जस्टिस ओका ने इस दौरान कहा कि अगर जेल में ट्रायल चलाए जाने का ऑप्शन है तो उस ऑप्शन को भी देखा जा सकता है। इस मामले में जितने भी आरोपी हैं उन सभी को आदेश से पहले सुना जाना जरूरी है।

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि मलिक ने मौजूदा याचिका में भी किसी वकील को नियुक्त नहीं किया है। उन्होंने बताया कि मलिक तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं और उन्होंने एक अन्य मामले में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने फिजिकल तौर पर पेश किया गया था और तब भी उन्होंने वकील नहीं रखा था। इन वजहों से सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न हुईं थी।

एनआईए कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा
शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि मलिक को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में वर्चुअल माध्यम से शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। मामले की सुनवाई अगले गुरुवार तक के लिए टाल दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को कहा है कि वह सभी आरोपियों को प्रतिवादी के रूप में शामिल करें। गौरतलब है कि मई 2022 में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने मलिक को साजिश, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकी फंडिंग के आरोपों में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एनआईए ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग की हुई है।

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