नई दिल्ली
यूपी पुलिस द्वारा पकड़े गए कथित ठग संजय राय ‘शेरपुरिया’ के एनजीओ यूथ रूरल एंटरप्रिन्योर फाउंडेशन (YREF) के एडवाजरी बोर्ड में रिटायर आईएएस, आईपीएस से लेकर सेना में अहम पदों पर रहे कई सेवानिवृत्त अफसर शामिल हैं। शेरपुरिया को पिछले हफ्ते यूपी एसटीएफ ने ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया था। शेरपुरिया के एनजीओ YREF के एडवाइजरी बोर्ड में एक ऐसे रिटायर्ड IAS अफसर भी नाम हैं, जिनका कुछ वक्त पहले पकड़े गए ठग किरण पटेल से भी कनेक्शन सामने आया था। किरण पटेल खुद को PMO का अफसर बताता था, और जम्मू-कश्मीर से पकड़ा गया था।
YREF के बोर्ड में एक आईपीएस अफसर का भी नाम है। इनका साल 2018 के बहुचर्चित ‘सीबीआई बनाम सीबीआई’ विवाद में नाम आया था। दिलचस्प बात यह है कि इस आईपीएस का बेटा YREF के एक अन्य डायरेक्टर के साथ मिलकर एक कंपनी भी चलाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कंपनी का पता कभी वही हुआ करता था, जो संजय राय का पता है।
मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के ब्यौरे के मुताबिक संजय राय के फाउंडेशन की शुरुआत 30 अक्टूबर 2019 को हुई थी। तब इस फाउंडेशन का रजिस्टर्ड ऑफिस बनारस हुआ करता था और गाजीपुर से चलता था। संजय राय ‘शेरपुरिया’ की आधिकारिक तौर पर इस एनजीओ में कोई भूमिका नहीं है, लेकिन यूपी पुलिस का दावा है कि एनजीओ वही चलाते हैं। वाईआरईएफ के एडवाइजरी बोर्ड में कुल 6 लोग हैं और 6 अतिरिक्त निदेशक भी हैं।
संजय राय शेरपुरिया के एनजीओ में कौन-कौन?
संजय राय के एनजीओ YREF के एडिशनल डायरेक्टर्स की लिस्ट पर नजर डालें तो इनमें एक नाम प्रदीप कुमार राय का है, जो दिल्ली एनसीआर बेस्ड एक कंपनी ‘निवेशन वेंचर्स’ के डेजिग्नेट पार्टनर हैं। इसी कंपनी के एक-दूसरे पार्टनर कुशाग्र शर्मा हैं, जो गुजरात कैडर के रिटायर आईपीएस अफसर एके शर्मा के बेटे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक ‘निवेशन वेंचरर्स’ 16 नवंबर 2017 को रजिस्टर हुआ था, और तब इसका पता Delhi Riding Club at No. 1, Safdarjung Road, New Delhi था। यूपी पुलिस की एफआईआर में संजय राय का यही पता दर्ज है। निवेशन वेंचर्स ने बाद में अपना पता S31, S 32 फर्स्ट फ्लोर, हरगोविंद एनक्लेव, अपोजिट डीएलएफ गेट, नई दिल्ली कर लिया है।
साल 2018 में जब सीबीआई के तत्कालीन डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच तनातनी की खबर आई थी, तब अस्थाना ने तत्कालीन कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखी चिट्ठी में प्रदीप कुमार राय का जिक्र लिया था और कहा था कि उनका नाम सरकार द्वारा बनाई ‘अवांक्षित संपर्क’ लिस्ट में है। हालांकि प्रदीप राय के वकीलों ने सारे आरोपों को नकार दिया था।
गौर करने वाली बात है कि एके शर्मा उस समय सीबीआई में ज्वाइंट डायरेक्टर हुआ करते थे। अब YREF की एडवाइजरी बोर्ड में शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एके शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया और मैसेज के जरिए सूचना दी कि वे ट्रैवल कर रहे हैं।
ठग किरण पटेल से कनेक्शन वाले पूर्व IAS भी एडवाइजर
YREF के एडवाइजरी बोर्ड में 1978 बैच के रिटायर्ड आईएएस अफसर एसके नंदा (SK Nanda) का नाम भी शामिल है। गुजरात कैडर के आईएएस रहे नंदा का नाम पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर से पकड़े गए ठग किरण पटेल केस में भी आया था। नंदा ने कथित तौर पर किरण पटेल की गुजरात में G20 से जुड़ी एक मीटिंग आयोजित करने में मदद की थी। इंडियन एक्सप्रेस ने जब एसके नंदा से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उनकी संजय राय से कुछ मुलाकातें हैं…शायद वाइब्रेंट गुजरात के दौरान और बस इतना ही संपर्क है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि संजय राय ने अपने एनजीओ के एडवाइजरी बोर्ड में मुझे कैसे शामिल कर लिया? मैं तो किसी मीटिंग में भी शामिल नहीं हुआ। हो सकता है मैं युवाओं के लिए जो काम कर रहा हूं, संजय राय उससे प्रभावित हों।
सेना में बड़े पदों पर रहे अफसर भी एडवाइजर
संजय राय के फाउंडेशन YREF के एडवाइजरी बोर्ड के अन्य लोगों में रिटायर्ड, वाइस एडमिरल सुनील आनंद (AVSM, NM), विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित रिटायर्ड एयर कमोडोर मृगेंद्र सिंह और उत्तर प्रदेश के एक और बहुचर्चित आईएएस अफसर भी शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने एयर कमोडोर मृगेंद्र सिंह से भी संपर्क किया। उन्होंने कहा कि संजय राय को मैं तब से जानता हूं, जब सर्विस में था। हालांकि पिछले 4 साल हमारी कोई मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन संपर्क में जरूर हैं। संजय राय भले शख़्स जान पड़ते थे और सत्ता के गलियारे में अच्छी पकड़ थी। हो सकता है जब एनजीओ बना रहे हों, तब एडवाइजरी बोर्ड में नाम डालने के लिए मेरी सहमति ली हो…मुझे ध्यान नहीं है लेकिन अब एनजीओ से मेरा कोई वास्ता नहीं है।
इसी तरह वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) सुनील आनंद ने भी वाईआरईएफ से किसी ताल्लुकात से इंकार किया। उन्होंने कहा कि मैं संजय राय को जानता हूं और मिला हूं लेकिन मुझे नहीं ध्यान है कि उन्होंने कभी अपने एनजीओ के एडवाइजरी बोर्ड में शामिल करने के लिए मुझसे बातचीत की थी, एनजीओ से मेरा कोई लेना देना नहीं है।
2022-23 में मिला 7.84 करोड़ का डोनेशन
यूथ रूरल एंटरप्रिन्योर फाउंडेशन (YREF) दावा करती है कि वह ग्रामीण युवाओं को मॉडर्न फार्मिंग प्रैक्टिस के जरिए रोजगार में मदद करती हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने जो दस्तावेज देखे हैं, उसके मुताबिक संजय राय के फाउंडेशन को वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान कुल 7.84 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला। डोनेशन देने वालों में दिल्ली एनसीआर की कई कंपनियां शामिल हैं। डालमिया परिवार से लेकर कई पीएसयू का भी नाम है।
पिछले वित्त वर्ष में शिप्रा एस्टेट लिमिटेड ने फाउंडेशन को एक करोड़ का डोनेशन दिया था। इसी तरह गुरुग्राम बेस्ड एनआईए सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 20 लाख, दिल्ली एनसीआर बेस्ड सेबरोज इंडस्ट्रीज ने दो किस्तों में 50 लाख का डोनेशन दिया था।
साल दर साल बढ़ता गया डोनेशन
YREF ने मार्च 2021 में बताया था कि उसे कुल 1. 34 करोड़ मिले। 1.3 करोड़ रुपए डोनेशन के जरिए आए थे। फाउंडेशन ने बताया था कि 87.8 लाख रुपये सामाजिक कार्यों पर खर्चे। इससे पहले मार्च 2020 में फाउंडेशन को 92.5 लाख रुपये डोनेशन के रूप मिले थे, जिसमें से 35. 25 लाख रुपए सामाजिक कार्यों और चैरिटी पर खर्चने की बात कही थी। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कई कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संजय राय के फाउंडेशन को यह पैसे सीएसआर के तहत डोनेशन के रूप में दिए गए थे। हालांकि न तो कंपनियों ने आधिकारिक ई-मेल का जवाब दिया, और न ही YREF ने ई-मेल पर अपना पक्ष रखा।
