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चीन के जासूसी जहाज का खतरा, भारत ने टाला अग्नि का परीक्षण, हिंद महासागर में यूं बड़ा सिरदर्द बना ड्रैगन

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बीजिंग/नई दिल्‍ली

भारत ने बंगाल की खाड़ी में अपने अग्नि मिसाइल के परीक्षण को टाल दिया है। माना जा रहा है कि चीन के जासूसी जहाज यूआन वांग-6 के खतरे को देखते हुए भारत ने इस परीक्षण को टाला है। चीन की सेना ने अपने मिसाइल और सैटलाइट की ट्रैकिंग करने वाले इस जहाज को इंडोनेशिया के पास से हिंद महासागर में भेजा है। भारत ने इससे पहले कहा था कि वह अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र में चीन के जासूसी जहाज को घुसने की अनुमति नहीं देगा। दक्षिण चीन सागर में दादागिरी दिखा रहा चीन अब हिंद महासागर पर अपनी नजरें गड़ा चुका है।

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस detresfa ने बताया कि भारत ने संदिग्‍ध मिसाइल परीक्षण के लिए अपने नोटम या नोटिस को रद कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि यह संभवत: भारत ने चीन के युआन वांग श्रेणी के ट्रैकिंग जहाज की हिंद महासागर क्षेत्र में मौजूदगी की वजह से किया है। बताया जा रहा है कि भारत अपनी अग्नि सीरिज की मिसाइल का बंगाल की खाड़ी में परीक्षण करना चाहता था। इससे पहले चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा में अपने एक अन्‍य जासूसी जहाज को तैनात किया था जिससे तीनों ही देशों के बीच राजनयिक तनाव भड़क गया था।

जानें कितना शक्तिशाली है चीन का जासूसी जहाज
चीन का यूआन वांग-6 जासूसी जहाज 22 हजार टन का है। इसमें विशाल एंटेना, अत्‍याधुनिक सर्विलांस उपकरण और सेंसर लगे हुए हैं जो इलेक्‍ट्रॉनिक जासूसी, सैटलाइट की लॉचिंग की निगरानी और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के परिक्रमा पथ को पकड़ने में काफी कारगर हैं। यह जासूसी जहाज शुक्रवार सुबह तक इंडोनिशया में बाली के पास तैर रहा था। इससे पहले भारतीय नौसेना ने कहा था कि वह चीनी जहाज पर करीबी नजर रखे हुए है।

चीन का यह जहाज पीएलए के रणनीतिक सपोर्ट फोर्स का हिस्‍सा है जिसमें चालक दल के 400 सदस्‍य हैं। यह जहाज सुंडा स्‍ट्रेट के रास्‍ते हिंद महासागर में घुसा है। इससे पहले भारत ने एक नोटम या नोटिस जारी करके बंगाल की खाड़ी में 10 और 11 नवंबर के लिए नो फ्लाई जोन घोषित किया था। भारत ने पिछले दिनों ही बलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम का परीक्षण किया था। खबरों के मुताबिक भारत का रणनीतिक फोर्स कमान अग्नि मिसाइल का यूजर ट्रायल करने वाला था।

श्रीलंका के हंबनटोटा को अपना गढ़ बनाना चाहता है चीन
सूत्रों के मुताबिक भारत जब भी इस तरह की मिसाइलों का परीक्षण करता है, उसके बारे में जासूसी करने के लिए चीन अपने जासूसी जहाजों को लगातार हिंद महासागर में भेजता रहता है। इसके जरिए चीन भारतीय मिसाइलों की स्‍पीड, सटीकता और रेंज के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है। इससे पहले भारत और अमेरिका ने श्रीलंका से चीन के जासूसी जहाज को हंबनटोटा में शरण देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्‍स ऑफ‍ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के लगातार आ रहे जासूसी जहाजों को रोकने के लिए भारत कुछ खास नहीं कर सकता है। इसकी वजह यह है कि प्रत्‍येक देश को समुद्र आने और जाने का अधिकार है।

चीन के जासूसी जहाज अक्‍सर हिंद महासागर में आते हैं और सबमरीन के परिचालन और अन्‍य चीजों के लिए जरूरी आंकड़े इकट्ठा करते हैं। भारत के लिए ज्‍यादा बड़ा सिरदर्द हंबनटोटा बंदरगाह बनता जा रहा है जहां चीन अपनी ताकत को लगातार बढ़ा रहा है। श्रीलंका ने हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को 99 साल के लीज पर दिया है। चीन अब भारत की नाक के नीचे बने इस श्रीलंकाई बंदरगाह का इस्‍तेमाल युद्धपोतों और सबमरीन को लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने के लिए कर रहा है। चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है।

हिंद महासागर में लॉजिस्टिक सपोर्ट बेस तलाश रहा चीन
चीन की नौसेना 355 युद्धपोत तथा सबमरीन से लैस है। यही वजह है कि चीन हिंद महासागर में लॉजिस्टिक सपोर्ट बेस तलाश रहा है। इससे पहले चीन ने अफ्रीकी देश जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्‍य अड्डा बनाया था। चीन पाकिस्‍तान के कराची और ग्‍वादर में पहले से मौजूद सुविधाओं के साथ, कंबोडिया, सेशेल्‍स और मारिशस में अपने युद्धपोतों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट का बेस बनाना चाहता है।

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