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आज टमाटर की कीमतों में लगी है आग, 1998 में प्याज ने छीन ली थी दिल्ली में BJP की कुर्सी

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नई दिल्ली

देश में इस समय टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं। 3 हफ्ते पहले जो टमाटर 20 से 30 रुपये किलो बिक रहा था वही अब शतक पार कर चुका है। देश के अलग-अलग शहरों में तो यह 100 से 122 रुपये किलो तक बिक रहा है। टमाटर की बढ़ती कीमतों ने सब्जी के स्वाद को भी फीका कर दिया है। घर में अमूमन हर सब्जी में टमाटर का प्रयोग होता है। जानकार बेमौसम बरसात को जिम्मेदार बता रहे हैं। लेकिन, आपको जानकार हैरानी होगी कि सब्जियों के आसमान छूते दाम किसी की सरकार भी गिरा सकते हैं। राजनीति के इतिहास को पलटकर देखेंगे तो पता भी चल जाएगा। आज जो कमाल टमाटर के बढ़े दाम कर सकते हैं वो कभी प्याज ने किया था। प्याज की बेकाबू कीमतों ने 1998 में दिल्ली की पहली महिला सीएम बनीं सुषमा स्वराज की सरकार गिरा दी थी। उन्होंने काफी कम समय के लिए दिल्ली की सत्ता संभाली थी लेकिन, प्याज की कीमतों ने उनसे वह भी छीन लिया था।

तब केंद्रीय मंत्री थीं सुषमा स्वराज, ऐसे बनीं सीएम
यह साल 1998 की बात है। दिवंगत सुषमा स्वराज तब केंद्र में अटल सरकार में सूचना, प्रसारण और दूसंचार मंत्री थीं। हरियाणा में भी वह कैबिनेट मंत्री का पद संभाल चुकी थीं। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकरा थी। तब सीएम की कुर्सी पर मदनलाल खुराना थे। उसी साल दिल्ली, महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में प्याज की कीमत लोगों को रुला रही थी। दिल्ली में प्याज की कीमते बढ़ने के बाद विपक्ष बी हमलावर हो गया और लगा मदनलाल सरकार को घेरने। देखते-देखते दिल्ली की उस समय की भाजपा सरकार पर दवाब बढ़ गया। पार्टी आलाकमान ने स्थिति को संभालने के लिए मदनलाल की जगह साहिब सिंह वर्मा को दिल्ली की कमान सौंप दी। हालांकि स्थिति फिर भी नहीं सुधरी। प्याज की कीमतें फिर भी नहीं घटीं। बीजेपी ने साहिब सिंह वर्मा को भी पद से हटा दिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री सुषना स्वराज को दिल्ली की कमान सौंपी गई।

प्याज ने सीएम बनाया और प्याज ने सरकार गिराई
मदन लाल खुराना और साहिब सिंह वर्मा को हटाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उस समय की केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज को दिल्ली की कमान सौंपी। तब दिल्ली विधासभा चुनाव को दो महीने से भी कम समय बचा था। सुषमा ने जब कमान संभाली तब वह दिल्ली की पहली महिला सीएम के रूप में जानी गईं। सुषमा ने दिल्ली की कु्र्सी संभालते ही प्याज की कीमतों को कम करने को लेकर कई प्रयास किए। सब प्रयासों में से एक प्याज को कथित तौर पर 5 रुपये प्रति किलो देने का भी वादा शामिल था। इससे सरकार की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे। लेकिन, यह सब काम न आया और आखिरकार, सुषमा स्वराज को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। हालांकि सुषमा ने अपनी दिल्ली में सरकार बचा ली थी।

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