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Tuesday, June 16, 2026
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UP: पुलिस की बर्बरता! कस्टडी में मरने वाले बलवंत के शरीर पर चोट के 22 निशान

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कानपुर देहात,

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में लूट के शक में उठाए गए व्यापारी बलवंत सिंह की पुलिस कस्टडी में मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मृतक बलवंत सिंह के शरीर पर सिर से लेकर पैर तक 22 से ज्यादा चोट के निशान पाए गए हैं. उसके शरीर का ऐसा कोई अंग नहीं था, जहां पर चोट के निशान नहीं है. हाथ बांधकर पीटने से कलाइयों में घाव के निशान मिले.

दरअसल, 6 दिसंबर की रात में मृतक बलवंत सिंह के चाचा चंद्रभान सिंह के साथ बाइक सवार तीन बदमाशों ने आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर तमंचे के बल पर उनसे रुपए की लूट की थी. चंद्रभान ने लूट का मुकदमा शिवली थाने में दर्ज कराया था. पुलिस उसकी जांच कर रही थी. जांच में पुलिस ने गांव के 3 लोगों को उठाया था.

इनसे पूछताछ में पुलिस ने बलवंत का नाम सामने आने की जानकारी दी थी. इसके बाद बलवंत को पुलिस ने उठाया. पुलिस की तरफ से बताया गया था कि बलवंत जब खुद चलकर थाने आया तो उसके सीने में दर्द होने लगा, इसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी.

वहीं मृतक बलवंत के परिजनों का आरोप था कि बलवंत गांव के ही राम राठौर के साथ अपनी पिकप गाड़ी से 12 दिसंबर को चोकर लेने रनिया गया हुआ था, तभी उसको पुलिस टीम ने उठा लिया और रनिया थाने ले जाकर इस कदर पिटाई की कि उसकी मौत हो गई और दो दिन से राम राठौर भी गायब थाय

एसपी सुनीति ने बलवंत की हार्ट अटैक से मौत होने की बात कही तो परिजनों ने हंगामा करते हुए शव को पोस्टमार्टम से बाहर निकाल कर शरीर पर चोट के निशान को देखा तो भड़क गए. परिजनों ने पुलिस हिरासत में मौत का आरोप लगाया और शव का पोस्टमार्टम कानपुर नगर मे कराने की मांग की थी.

13 दिसंबर की रात में शव का पोस्टमार्टम जब कानपुर में हुआ तो परिजनों का आरोप सच साबित हुआ. बलवंत के शरीर पर 22 से अधिक चोटों के निशान मिले. मृतक के दोनों हाथों की कलाइयों पर निशान, पैर के तलवों से लेकर घुटनों तक, कमर के नीचे और पीठ पर लाठियों के निशान मिले. डॉक्टरों मे चर्चा थी कि मृतक की तड़प तड़प कर मौत हुई है.

मृतक बलवंत के साथ पुलिस द्वारा उठाए गए राम राठौर को पुलिस ने मंगलपुर थाने में बैठा रखा था. बुधवार देर शाम उसकी अचानक तबीयत खराब होने पर पुलिस ने उसे हवासपुर सीएससी में भर्ती करवाया, उसके बाद जब वह उसकी हालत में सुधार हुआ तो पुलिस ने उसे अपने घर नाना सोनेलाल के हवाले कर दिया.

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