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Wednesday, April 1, 2026
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अमेरिका-बेल्जियम ने UN में भारत को कठघरे में खड़ा किया, पूछे तीखे सवाल

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नई दिल्ली,

स्विट्जरलैंड के जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की बैठक में अमेरिका और बेल्जियम, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और हेट स्पीच पर भारत से सवाल करेंगे. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र का एक कार्यकारी समूह मानवाधिकारों पर चौथी यूनिवर्सल पीरियॉडिक रिव्यू (यूपीआर) मीटिंग के दौरान भारतीय पक्ष द्वारा पेश राष्ट्रीय रिपोर्ट की समीक्षा करेगा और भारत से सवाल-जवाब भी करेगा.

यूनिवर्सल पीरियॉडिक रिव्यू एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को बाकी सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की समीक्षा करने का अवसर दिया जाता है. ये समूह सात से 18 नवंबर के दौरान कई अन्य देशों के रिकॉर्ड की भी जांच करेगा.सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता गुरुवार को होने वाली इस समीक्षा बैठक में भाग लेने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.

अमेरिका और बेल्जियम ने भारत से मांगे जवाब
इस दौरान भारत की ओर से सौंपी गई राष्ट्रीय रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी. साथ ही बैठक में पत्रकारों और ह्यूमन राइट्स के लिए काम करने वाले लोगों के साथ सरकार के व्यवहार, CAA,फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) जैसे मुद्दों पर सवाल किए जाएंगे.

परिषद में अमेरिका और बेल्जियम की तरफ से भारत से पहले ही कई सवालों के जवाब मांगे हैं. इन देशों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ बताया है और भारत से पूछा है कि क्या इस कानून को निरस्त किया जाएगा. बेल्जियम ने ये भी कहा कि क्या भारत सरकार CAA और धर्मांतरण विरोधी कानूनों की समीक्षा और उन्हें निरस्त करेगा जो भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं.

परिषद में भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर बहस होगी
इन दोनों देशों ने ये भी पूछा कि क्या भारत सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि उनके देश में पत्रकारों, ह्यूमन राइट्स और सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन्स को अभिव्यक्ति, अपने अधिकारों का प्रयोग करने और विरोध प्रदर्शन करने की आजादी है.

UNHRC में गुरुवार को होने वाली बैठक से पहले ही अमेरिका, बेल्जियम, स्पेन, पनामा, कनाडा और स्लोवेनिया ने अपने सवाल परिषद में पेश कर दिए थे.वहीं, इस दौरान अमेरिका ने भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर सख्त टिप्पणियां भी की हैं और अल्पसंख्यकों की स्थिति, हिंदूवादी संगठनों, एक्टिविस्ट के अधिकारों और गोहत्या कानूनों से जुड़े अब तक आठ सवाल भी पेश किए हैं.

एक सवाल में अमेरिका ने भारत में हिजाब के मुद्दे पर पिछले कुछ समय पहले हुए विवाद का जिक्र करते हुए कहा, ”भारत के एक राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक पोशाक पहनकर जाने पर काफी विवाद हुआ था. हम उन घटनाओं को लेकर भी चिंतित हैं जिनमें धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों को डराया-धमकाया गया. क्या भारत सरकार बताएगी कि वो धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों को भेदभाव से बचाने के लिए क्या कदम उठा रही है.”

अमेरिका ने भारत सरकार से ये भी पूछा है कि भारत सरकार को बताना चाहिए कि यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act (UAPA), राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए, 499 और 500 जैसे कानूनों में मानवाधिकार को लेकर भारत अपनी प्रतिबद्धता का किस तरह पालन कर रहा है. अमेरिका ने भारत से ये भी पूछा है कि वो अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती करने के आरोपियों पर क्या कार्रवाई कर रहा है.

इस साल अगस्त में परिषद को प्रस्तुत राष्ट्रीय रिपोर्ट में भारत की ओर से बताया गया था कि अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनों को सख्ती से लागू किया जा रहा है. भारत के इस रुख से साफ है कि वह यूएनएचआरसी की अगली बैठक में मानवाधिकारों के सवालों पर मजबूती से जवाब देगा.

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