देहरादून/चमोली
सीमांत जनपद चमोली जिले में भारत को चीन सीमा से जोड़ने वाले नीति-मलारी राजमार्ग पर सोमवार को पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूट कर गिर गया। पहाड़ के इस तरह से टूटने से लोगों की सांसें अटक गईं। गनीमत रही कि उस मार्ग से केाई वाहन नहीं गुजर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। पहाड़ी के टूटने से आये मलबे के कारण राजमार्ग बाधित हो गया, लेकिन बीआरओ ने कुछ घंटों की मशक्कत के बाद देर शाम तक रास्ता खोल कर यातायात सुचारू कर दिया।
आज दोपहर के समय चमोली जनपद में नीती मलारी नेशनल हाईवे हाईवे पर पहाड़ टूटकर गिरने का एक वीडियो वायरल होने लगा। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से पहले कुछ पत्थर गिरे और फिर कुछ ही सेकेंड में पहाड़ का बड़ा सा हिस्सा भरभराकर गिर गया। इसके बाद हाईवे पर चारों तरफ धूल का गुबार दिखाई दिया।
उत्तराखंड के चमोली में जोशीमठ-मलारी- नीती बॉर्डर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भरभरा कर पहाड़ टूटा गया। भारी मात्रा में मलबा आने से राजमार्ग बाधित हो गया। @NavbharatTimes pic.twitter.com/XN2CWhEGVS
— NBT Uttar Pradesh (@UPNBT) March 3, 2025
कुछ घंटे में खोला गया रास्ता
इस भूस्खलन के बाद से नीती घाटी में बसे गांवों के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं, क्योंकि उनका संपर्क जिला और तहसील मुख्यालय से कट गया। इसके अलावा आईटीबीपी और सेना समेत बीआरओ को भी रसद पहुंचाने में दिक्कत आने की समस्या खड़ी हो गई थी। हालांकि कुछ घंटे तक कड़ी मशक्कत करने के बाद रास्ता खोल दिया गया और यातायात को सुचारू कर दिया गया।
पवर्वतीय क्षेत्रों में कभी तेज धूप तो कभी भारी बारिश और बर्फबारी हो रही है, जिसका असर पहाड़ों पर भी पड़ रहा है। नीती मलारी नेशनल हाईवे पर भी जब चटक धूप निकली तो पहाड़ी भरभराकर ढह गई। बता दें कि 28 फरवरी को चमोली जिले में माणा गांव के पास एवलांच आया था, जिसमें बीआरओ के 54 मजदूर दब गए थे। तीन दिन चले रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना और आईटीबीपी के जवान ने 46 मजूदरों को तो बचा लिया था, जबकि 8 मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
