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Wednesday, April 1, 2026
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रूस में आखिर ऐसा क्या बोल गए विदेश मंत्री जयशंकर कि गदगद हो गया चीन!

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बीजिंग

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को मॉस्को में कहा कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए फायदेमंद है और भारत ऐसा करना जारी रखेगा। मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात के दौरान जयशंकर ने यह बयान दिया जिसे अमेरिकी जैसे पश्चिमी देशों के लिए एक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। रूस से तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देश लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले भी कई बार जयशंकर वैश्विक मंचों से भारत-रूस संबंधों पर सवाल उठाने वालों को जवाब दे चुके हैं। अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंध रखने वाले चीन को भारतीय विदेश मंत्री का बयान खासा पसंद आया है।

जयशंकर के बयान की तारीफ करते हुए ग्लोबल टाइम्स के पत्रकार हू शिजिन ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ‘भारत एक स्वतंत्र कूटनीति वाला देश है, जो दुनियाभर में अपना प्रभाव बढ़ाने की खातिर इसके लिए दरवाजे खोलता है। यह उम्मीद की जा सकती है कि भारत का व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रभाव अमेरिका को छोड़कर कई पश्चिमी देशों से आगे निकल जाएगा।’ फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ था। इसके बाद एक-एक कर रूस पर कई प्रतिबंध लगने लगे। लेकिन भारत ने तटस्थ नीति का पालन करते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा।

रूस पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर
संयुक्त राष्ट्र से लेकर एससीओ जैसे मंचों से भारत युद्ध और हिंसा की खुलकर निंदा कर चुका है। रूस से व्यापारिक संबंधों की वजह से पश्चिमी देश भारत से नाराज हैं। इस बीच जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को मॉस्को पहुंचे। भारत-रूस संबंधों पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहद मजबूत और समय की कसौटी पर परखे हुए संबंध हैं। अपने भाषण में जयशंकर ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी, वित्तीय दबाव और व्यापारिक कठिनाइयों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाला है। अब इसके ऊपर हम यूक्रेन युद्ध के नतीजे देख रहे हैं।

वैश्विक और क्षेत्रीय चिंताओं को दूर करेगा बातचीत
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन बारहमासी मुद्दे हैं। दोनों का विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जयशंकर ने बताया कि हमारी बातचीत समग्र वैश्विक स्थिति के साथ-साथ कुछ खास क्षेत्रीय चिंताओं को दूर करेगी। सितंबर में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने जयशंकर के एक बयान का हवाला देते हुए कहा था कि अमेरिका और पश्चिम की तुलना में हम भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान करते हैं और नई दिल्ली के रणनीतिक संयम को देखकर खुश हैं जिसे आसानी से मूर्ख नहीं बनाया जा सकता।

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