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ट्रंप ने बैठे-बैठाए ये क्‍या कर दिया, दुश्‍मनों को बना दिया दोस्‍त, चीन से भारत को मिले इस ऑफर का मतलब समझ‍िए

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नई दिल्‍ली

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने दुनिया का कारोबारी समीकरण सिर के बल खड़ा कर दिया है। एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी बीच का रास्‍ता निकालने लगे हैं। उनमें नजदीकी बढ़ रही है। चीन भारत से और सामान खरीदने को तैयार है। पड़ोसी देश के राजदूत शू फेहोन्‍ग ने यह बात कही है। उन्होंने यह बात अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने की घोषणा से ठीक पहले कही। उनका कहना है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित करने में मदद मिलेगी। राजदूत ने कहा कि वह भारत के साथ व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हैं। वह भारत से और अधिक सामान खरीदना चाहते हैं जो चीनी बाजार के लिए उपयुक्त हों।

भारत और चीन के बीच 2023-24 में 101.7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। भारत के व्यापार मंत्रालय के अनुसार, इसमें भारत को नुकसान हो रहा है। भारत मुख्य रूप से पेट्रोलियम तेल, लौह अयस्क, समुद्री उत्पाद और वनस्पति तेल का निर्यात करता है, जो 16.6 अरब डॉलर का है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप जल्द ही दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाने वाले हैं। उन्होंने चीन और भारत पर व्यापार के अनुचित तरीके अपनाने का आरोप लगाया है।

भारत और चीन के बीच व्यापार को संतुलित करने के लिए चीन अब भारत से ज्‍यादा सामान खरीदने को तैयार है। राजदूत शू फेहोन्‍ग ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर व्यापार को और मजबूत करना चाहता है। वे भारत से ऐसे उत्पाद खरीदना चाहते हैं जो चीन में पसंद किए जाएं। उन्होंने यह बात भारत और चीन के राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने पर कही।

2020 के बाद संबंधों में आई ग‍िरावट
2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए थे। यह 40 सालों में पहली बार था जब दोनों देशों के सैनिकों के बीच जानलेवा झड़प हुई थी। इसके बाद भारत ने चीन के कई निवेश रोक दिए थे। चीनी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच मुश्किल कर दी थी।

पिछले साल ब्रिक्‍स सम्मेलन में शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिले थे। दोनों शीर्ष नेता सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमत हुए थे। इससे रिश्तों में सुधार के संकेत मिले थे। इससे पहले दोनों नेताओं की 2019 के बाद कोई औपचारिक मुलाकात नहीं हुई थी।भारत और चीन के बीच रिश्ते पहले उतने अच्छे नहीं थे, लेकिन अब धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। दोनों देश व्यापार और अन्य क्षेत्रों में मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका के फायदे में नहीं भारत-चीन की दोस्‍ती
भारत और चीन की दोस्ती से अमेरिका को कई तरह से नुकसान हो सकते हैं। पहले तो आर्थिक नुकसान की ही बात कर लेते हैं। अगर भारत और चीन मिलकर व्यापार करते हैं तो अमेरिका को अपने सामान बेचने में कठिनाई होगी। चीन और भारत मिलकर तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं, जिससे अमेरिका को चुनौती मिलेगी। अमेरिका की कई कंपनियां चीन से रिश्ते खराब होने के बाद अब भारत में अपना बिजनेस करना चाहती हैं। अगर भारत और चीन में दोस्ती होती है तो अमेरिका को इससे नुकसान हो सकता है।

अमेरिका के लिए इस दोस्‍ती के राजनीतिक नुकसान भी हैं। भारत और चीन मिलकर एक शक्तिशाली गठबंधन बना सकते हैं। इससे अमेरिका का वैश्विक प्रभाव कम हो सकता है। भारत और चीन के बीच मजबूत संबंध अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं। रूस, भारत और चीन वाला ब्रिक्‍स पहले से ही अमेरिका की टेंशन बना हुआ है। इसके अलावा, भारत और चीन मिलकर सैन्य शक्ति बढ़ा सकते हैं, जिससे अमेरिका को अपनी सुरक्षा नीति में बदलाव करना पड़ सकता है। अमेरिका रूस को चीन से दूर करने के लिए कई हथकंडे अपना रहा है। अगर भारत और चीन में दोस्ती होती है तो अमेरिका को इससे नुकसान हो सकता है।

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