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जब मंत्री से अड़ गए मनमोहन, मैं चला जाऊंगा पढ़ाने… तब शायद कभी PM नहीं बन पाते

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नई दिल्‍ली

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कई किस्‍से जुड़े हैं। मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्री बनने तक का सफर बहुत द‍िलचस्‍प रहा है। इसमें कई मोड़ आए। हर बार किस्‍मत ने उनका साथ दिया। शुरुआती दिनों में उनका अपनी बात पर अड़कर किसी से भी मोर्चा ले लेना नुकसान की जगह उन्‍हें फायदा पहुंचाता गया। बात उन दिनों की है जब मनमोहन कैंब्रिज से लौटे थे। उन्हें विदेश व्यापार विभाग में सलाहकार नियुक्त किया गया था। तब इस विभाग के मंत्री ललित नारायण मिश्र थे। किसी बात पर उनकी मिश्र से झांय-झांय हो गई थी। तब उन्‍होंने ल‍लित नारायण को दो-टूक शब्‍दों में कहा था कि ज्‍यादा हुआ तो वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अपनी प्रोफेसर की नौकरी पर वापस चले जाएंगे। तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री होती थीं। उनके सचिव थे पीएन हक्‍सर। उन्‍हें इस बात की भनक लग गई थी। उन्होंने मनमोहन सिंह को वित्‍त मंत्रालय आने की पेशकश की थी। मनमोहन को वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनने का ऑफर दिया गया था।

मनमोहन ने कहा था- चला जाऊंगा पढ़ाने
यह उन दिनों की बात है जब मनमोहन सिंह को विदेश व्‍यापार विभाग में एडवाइजर नियुक्‍त क‍िया गया था। मनमोहन ने भारत के आयात और निर्यात पर कैंब्रिज में अपना शोध किया था। इसे देखते हुए उन्‍हें यह जिम्‍मेदारी दी गई थी। उन द‍िनों व‍िभाग की कमान ललित नारायण मिश्र के हाथों में थी। एक बार की बात है। ललित नारायण मिश्र मनमोहन सिंह से नाराज हो गए थे। वह कैबिनेट में भेजे गए नोट से सहमत नहीं थे। इसी को लेकर मनमोहन सिंह से उनकी कहासुनी हुई थी। मनमोहन सिंह ने तब कहा था कि वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अपनी प्रोफेसर की नौकरी पर वापस चले जाएंगे। दिल्‍ली यूनिवर्सिटी में तब सिंह इंटरनेशनल ट्रेड के प्रोफेसर थे। यह बात 1969-71 की है। इस बात की भनक तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सचिव पीएन हक्‍सर को लग गई थी। उन्होंने मनमोहन सिंह से बात की। इस बातचीत में उन्‍होंने मनमोहन से कहा कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने तब मनमोहन को वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनने की पेशकश की थी। इस तरह ललित नारायण मिश्र के साथ लड़ाई उनके लिए प्रमोशन लेकर आई। इसके बाद वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर भी रहे। आरबीआई में उनका कार्यकाल 16 सितंबर 1982 से 14 जनवरी 1985 तक रहा।

सुबह 4 बजे नहा लेते थे मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह से जुड़ा एक और बहुत दिलचस्‍प किस्‍सा है। यह भी उनके कैंब्रिज के दिनों का है। मनमोहन का शुरुआती जीवन गांव में बीता था। गांव में लोग सूरज उगने के साथ नहा लेते हैं। मनमोहन सिंह ने इंग्लैंड जाकर भी इस आदत को नहीं बदला। वह यहां भीषण सर्दी में भी हर रोज सुबह 4 बजे नहा लेते थे। यह बात उनके साथ के दोस्‍तों को बहुत हैरान कर देती थी।

मनमोहन को ज्‍यादा बोलना पसंद नहीं था। इस कारण उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में विपक्ष उन्‍हें ‘मौन’ मंत्री भी कहता था। लेकिन, उनकी ईमानदारी और निष्‍ठा हमेशा बेदाग रही। संजय बारू ने अपनी किताब में लिखा है कि वह बेहद शर्मीले और शांत स्‍वभाव के रहे हैं। जब दूसरे बातें करते थे तो वह खुश होते थे। मनमोहन को लगता था कि उन्‍हें बोलना नहीं पड़ेगा।

राजनीति में एंट्री भी रोचक थी
पीवी नरसिम्‍हा राव सरकार में मनमोहन वित्‍त मंत्री बने। राव जिस दिन अपनी कैबिनेट बना रहे थे, उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी को मनमोहन के पास भेजा था। उन्‍होंने मनमोहन से कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि वह वित्त मंत्री बनें। तब मनमोहन ने सोचा कि वह ऐसे ही यह बात कह रहे हैं। फिर अगले दिन नरसिम्हा राव मनमोहन सिंह के पास आए। इस बार वह थोड़े गुस्से में थे। उन्होंने मनमोहन से कहा कि वह तैयार हो जाएं और शपथ लेने के लिए राष्ट्रपति भवन चलें। इस तरह से उनका राजनीति में प्रवेश हुआ था। वह देश के 22वें वित्‍त मंत्री थे। राव सरकार में वह 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक वित्‍त मंत्री के पद पर रहे। प्रधानमंत्री के तौर पर उन्‍होंने लंबा कार्यकाल बिताया। वह 2004 से 2014 तक दो कार्यकाल में पीएम रहे।

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