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Friday, March 27, 2026
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ऐसी बारिश दिसंबर में कहां होती है… मनमोहन सिंह के घर की असहज खामोशी और ये बदला हुआ मौसम

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नई दिल्ली

‘आज सुबह से ही आसमान बरस रहा है, ऐसी बारिश दिसंबर में कहां होती है….लगता है डॉ साहब के जाने पर आसमान भी गमजदा है’। डॉ मनमोहन सिंह के आवास के बाहर जुटी मीडिया के जमावड़े में से किसी एक शख्स ने कहा। मौसम विभाग से जुड़ा डेटा बताता है कि पिछली बार दिसंबर में ऐसी बारिश 15 साल पहले हुई थी। 3 मोतीलाल नेहरू मार्ग का जो घर पिछले दस सालों से डॉ मनमोहन सिंह की रिहाइश रहा है, इससे पहले दिल्ली की सीएम शीला दीक्षित का आवास था। घर के बाहर पुलिस के बैरिकेड्स की मौजूदगी संजीदगी के माहौल की असहजता को बयां करने के लिए काफी है।

बंगले के बाहर रेनकोट पहने किसी तरह कैमरे को बचाते नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया का जुटान देखा जा सकता है। कई सीनियर पत्रकार अपने पत्रकारीय अनुभव को एक दूसरे से शेयर करते दिखे। बंगले के बाहर तगड़ी सेक्योरिटी और मीडिया की भीड़ के बीच राजनेताओं का तांता लगा रहा। श्रद्धांजलि और सम्मान की शक्ल में राजनेता मनमोहन सिंह को नमन करने के लिए उनके घर आते दिखे। बंगले के भीतर कांग्रेस की पहली पंक्ति से लेकर ग्राउंड की पंक्ति से आए लोग डॉ सिंह को आखिरी बार देखने के लिए उमड़ पड़े।

‘देश के लोग आंसू बहा रहे हैं’
दिल्ली के किराड़ी से आए एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने उन्हें याद करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह ने देश के लिए क्या किया, ये आज दिख रहा है जब ना सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ता बल्कि देश के कितने ही लोग आंसू बहा रहे हैं। इस बीच बंगले से बाहर सचिन पायलट निकलते हैं, पायलट उस जनरेशन से रहे हैं, जिसने 91 में इकोनॉमी के द्वार को खुलते देखा होगा। आसमान से पड़ रही बूंदों के बीच पत्रकारों से घिरे सचिन अपनी नजदीकियों का जिक्र करते हुए बताते हैं कि किस तरह यूपीए के वक्त नीतियों ने हर वर्ग को कुछ ना कुछ दिया ही।

‘युवा नेताओं से लेकर उनके साथ…’
इसके बाद यूपीए सरकार में पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह के साथ काम कर चुके शशि थरूर श्रद्धांजलि देकर बाहर आते हैं, मीडिया से मुखातिब होकर डॉ मनमोहन सिंह को याद करते हैं। इतने में मीडिया में हलचल होती है कि स्टालिन आ गए और तमिलनाडु के सीएम की गाड़ी बंगले के भीतर जाती दिखती है। पार्टी सांसद गौरव गोगोई पैदल ही आते दिखते हैं, उनके हाथ में सफेद फूल हैं, कांग्रेस की इस पीढ़ी के कई नेता राजनीतिक ककहरे में डॉ मनमोहन की विदेश नीति और अर्थनीति की अहम जगह रखता है। युवा नेताओं से लेकर उनके साथ काम कर चुके, हर उम्र और अनुभव के राजनेताओं के कदम उनके बंगले की ओर जाते दिखे। दिल्ली के ही रहने वाले एक दूसरे कार्यकर्ता ने हमसे कहा, सहज और सरल पीएम रहे मनमोहन सिंह, अपने बयानों पर खरे उतरे। उनके बारे में जब सुना तो रहा ना गया।’

कांग्रेस हेडक्वार्टर पर सन्नाटा पसरा
कुछ दूरी पर ही कांग्रेस हेडक्वार्टर पर बारिश के बीच सन्नाटा पसरा है। एक ओर मीडिया के कैमरों के अलावा पूरे परिसर में इक्का दुक्का लोग ही दिखते हैं। एंट्रेस पर ही डॉ सिंह की तस्वीर लगी है, जहां कार्यकर्ता फूल चढ़ा कर उन्हें नमन कर रहे हैं। यहां शनिवार को उनका पार्थिव शरीर लोगों के आखिरी दर्शन के लिए रखा जाएगा। मनमोहन सिंह खामोश रहकर काम करते थे, ये उनका काम करने का लहजा था। आज वो खामोश हैं, लेकिन दुनिया के पास उनकी स्मृतियों को लेकर कितना कुछ है सुनाने को। एक किस्से से दूसरा किस्सा निकल आ रहा है। भले ही 3 मोतीलाल नेहरू मार्ग के गोलचक्कर की सड़कें खामोश हैं, लेकिन कुदरत बरस रही है, अपना गम दर्ज करवा रही है।

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