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पैंगोंग झील के किनारे लगी छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा पर क्यों छिड़ा विवाद, जानिए पूरा मामला

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नई दिल्ली

ईस्टर्न लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा लगाने पर विवाद भी उठ गया है। स्थानीय लोगों ने इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाया है। हालांकि डिफेंस सूत्रों के मुताबिक वहां तैनात सेना की मराठा यूनिट ने स्वैच्छिक योगदान कर इस प्रतिमा को लगाया है और इसे बनाने में पब्लिक फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया। सेना की लेह स्थित 14वीं कोर ने सोशल मीडिया में छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा के अनावरण की तस्वीरों के साथ जानकारी पोस्ट की थी।

14300 फीट की ऊंचाई पर शिवाजी की प्रतिमा
इसमें बताया गया कि 26 दिसंबर को 14300 फीट की ऊंचाई पर पैंगोंग झील के किनारे छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा का अनावरण फायर एंड फ्यूरी कोर के जीओसी और मराठा लाइट इंफ्रेंट्री के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने किया। इस प्रतिमा को वीरता, विजन और अडिग न्याय का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया में इसकी तस्वीरें आने के बाद इसे लेकर विवाद भी होने लगा।

लद्दाख में चुसूल के काउंसलर ने उठाए सवाल
लद्दाख के चुसूल के काउंसलर ने इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह स्थानीय लोगों की राय लिए बिना स्थापित की गई है और इसकी हमारे यूनिक एनवायरमेंट और वाइल्डलाइफ को लेकर क्या प्रासंगिकता है। काउंसिलर ने लिखा कि हमें उन प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देनी चाहिए जो वास्तव में हमारे समुदाय और प्रकृति को दर्शाते हों और उसका सम्मान करते हों।

रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों ने क्या कहा
सेना के कई रिटायर्ड अधिकारियों ने भी पैंगोंग झील के किनारे प्रतिमा लगाने को लेकर सोशल मीडिया में कटाक्ष किया। स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता सज्जाद कारगिली ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि लद्दाख में शिवाजी का कोई सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व नहीं है। हम उनकी विरासत का सम्मान करते हैं, लेकिन यहां ऐसे सांस्कृतिक प्रतीकों को थोपना अनुचित है।

रक्षा सूत्र बोले- प्रतीकों को लगाने की लंबी परंपरा
हालांकि डिफेंस सूत्रों ने कहा कि इंफ्रेंट्री (पैदल सेना) यूनिट में अपनी यूनिट से संबंधित प्रतीकों को लगाने की लंबी परंपरा है, यह सैनिकों को प्रेरित करने के लिए किया जाता है। पैंगोंग झील के किनारे जहां शिवाजी की प्रतिमा लगाई गई है, वह सेना की एक मराठा यूनिट के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में आता है। यह एरिया रिस्ट्रिक्टेड एरिया है। साथ ही यूनिट के सैनिकों और यूनिट के पूर्व सैनिकों ने स्वैच्छिक योगदान कर इस प्रतिमा को लगवाया है।

कुपवाड़ा में भी लगी थी शिवाजी की प्रतिमा
नवंबर 2023 में भी जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा जिले में एलओसी के पास 10.5 फीट ऊंची शिवाजी की प्रतिमा का अनावरण किया था। वह प्रतिमा मुंबई से भेजी गई थी और इसे 41 राष्ट्रीय राइफल्स (मराठा लाइट इंफ्रेंट्री) के मुख्यालय में स्थापित किया गया। पिछले साल दिसंबर में नेवी डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में 35 फीट ऊंची शिवाजी प्रतिमा का अनावरण किया था, जो इस साल अगस्त में ढह गई थी।

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