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राम क्यों लंका नहीं ले गए थे अयोध्या की सेना, सीता का श्राप… सोशल मीडिया पर क्यों हो रही थू-थू

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अयोध्या

‘सीताहरण के बाद प्रभु श्रीराम जब रावण की नगरी लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे तो अयोध्या की सेना लेकर क्यों नहीं गए। जानते हैं आप। अगर अयोध्या के लोगों को लेकर जाते तो यहां के लोग सोने की नगरी देख रावण से ही समझौता कर लेते।’ सोशल मीडिया एक्स का यह पोस्ट अयोध्या लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम की एक तस्वीर पेश करता है। दरअसल, अयोध्या सीट पर भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद को जीत मिली है।

अयोध्या में रामलला मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद उम्मीद की जा रही थी कि इस सीट पर भाजपा आसानी से जीतेगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने अयोध्या के पूर्व सांसद लल्लू सिंह के पक्ष में एक भव्य रोड शो का आयोजन किया था। लेकिन, इन तमाम कार्यों का कोई प्रभाव जमीन पर नहीं दिखा। अब सोशल मीडिया पर यह चर्चा का हॉट टॉपिक बना हुआ है।

सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ी है चर्चा
सोशल मीडिया पर लगातार अयोध्या में भाजपा की हार पर चर्चा हो रही है। फेसबुक और एक्स पर यूजर्स लगातार इस मामले पर चर्चा कर अयोध्या के लोगों को घेर रहे हैं। यूजर रघुराज रावत ने लिखा कि इतिहास गवाह है कि अयोध्यावासियों ने हमेशा अपने सच्चे राजा के साथ विश्वासघात किया है। वहीं, सुषमा मिश्रा ने लिखा कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले यूपी में जीत रहे हैं। सुशांत चावला ने लिखा कि हिंदुओं तुम्हें अहसास भी है, तुमने श्रीराम को धोखा दिया है।

एक्स यूजर डॉ. रघुराज शर्मा ने ट्विटर पर सीरियल रामायण का एक वीडियो पोस्ट कर लिखा कि अयोध्या वालों ने एक बार फिर वही करके दिखाया। इस वीडियो में राम का पात्र निभा रहे कलाकार जनता के स्वार्थी होने की बात करते दिख रहे हैं। वहीं, अयोध्या में विकास के नाम पर लोगों को विस्थापित किए जाने का वीडियो के जरिए हार के कारण भी गिनाए गए।

क्या है माता सीता के श्राप का किस्सा?
हिंदूओं का पवित्र स्थान होने के बाद भी चार साल पहले तक राम की अयोध्या नगरी उजाड़ और वीरान थी। अयोध्या का विकास न होने पाने को लेकर मानते थे कि सीता माता के श्राप के कारण यह स्थिति है। दरअसल, पूरा मामला सीता माता के वनवास जाने की कहानी से जुड़ा है। लोगों का कहना है कि लंका में रावण के वध के बाद वनवास खत्म करके प्रभु राम और सीता माता अयोध्या वापस आए। चारों तरफ खुशी छा गई। हालांकि, खुशियां अधिक समय नहीं रह सकी। भगवान राम ने सीता माता का त्याग कर उन्हें वापस वनवास के लिए भेज दिया।

शास्त्रों के अनुसार, भगवान राम ने सीता माता को त्यागने का निर्णय अयोध्या के एक धोबी के तंज कसने पर लिया था. धोबी ने सीता माता को पराये मर्द (रावण) के पास रहने का तंज कसा था। भगवान राम ने माता सीता को बिना कुछ बताए ही लक्ष्मण के साथ वनवास पर भेज दिया। वहां पहुंचने के बाद माता सीता को इस बारे में पता चला। कहावत है कि सीता माता भगवान राम के इस फैसले से गुस्सा गईं। उन्होंने अयोध्या नगरी के लोगों की सोच को जिम्मेदार मानते हुए श्राप दे दिया।

माता सीता ने श्राप में कहा कि वह कभी भी खुश नहीं रहेगी। अयोध्या हमेशा उदास और उजड़ी रहेगी। माना जाता है कि माता सीता के इसी श्राप के वजह से ही महाभारत के युद्ध में रघुवंश के आखिरी राजा यानी प्रभु राम के आखिरी वंशज राजा बृहद्बल की मृत्यु के बाद अयोध्या उजड़ गई। 2019 में सुप्रीम कोर्ट का राम मंदिर से संबंधित आदेश से पहले अयोध्या नगरी की स्थिति काफी खराब थी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या का वैभव लौटने की बात कही गई। हालांकि, अब भाजपा की यहां से हार के बाद एक बार फिर भाजपा सरकार का अधिक ध्यान न जाने की बात कही जाने लगी है।

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