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जेलेंस्की का पीएम मोदी को यूक्रेन आने का निमंत्रण, क्या रूस की नाराजगी का जोखिम उठाएगा भारत?

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हिरोशिमा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश आने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने यह निमंत्रण दोनों नेताओं की जापान के हिरोशिमा में हुई मुलाकात के दौरान दिया। भारत के विदेश सचिव विजय मोहन क्वात्रा ने पीएम मोदी को यूक्रेन दौरे के लिए दिए गए निमंत्रण की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पीएम मोदी ने उनके निमंत्रण को स्वीकार किया है कि नहीं। पिछले साल रूस के आक्रमण के बाद से ही अमेरिका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों के कई बड़े नेता यूक्रेन का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान सिर्फ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रूस का दौरा किया है।

हिरोशिमा में पीएम मोदी से मिले जेलेंस्की
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पीएम मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय वार्ता भी की। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन युद्ध दुनिया में एक बड़ा मुद्दा है। मैं इसे सिर्फ अर्थव्यवस्था या राजनीति का मुद्दा नहीं मानता। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह मानवता का मुद्दा है। भारत और मैं युद्ध के समाधान के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, करेंगे। इसके अलावा जेलेंस्की ने पीएम मोदी को यूक्रेनी पीस फॉर्मूला इनिशिएटिव के बारे में विस्तार से जानकारी दी और भारत को इसके कार्यान्वयन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत से मानवीय सहायता और मोबाइल अस्पतालों की मांग भी की।

क्या यूक्रेन दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी
पीएम मोदी वैश्विक नेता हैं। यूक्रेन जानता है कि पीएम मोदी की बात को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन टाल नहीं सकेंगे। पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे को जेलेंस्की की बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जाएगा। इससे पूरी दुनिया में संदेश जाएगा कि भारत अब यूक्रेन के साथ खड़ा है। इस दौरे को रूस के खिलाफ भी देखा जा सकता है। भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं। रूस ने भारत को हर मुश्किल परिस्थितियों में मदद की है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि शायद ही पीएम मोदी यूक्रेन का दौरा करें।

पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे से रूस का चिढ़ना तय
पीएम मोदी अगर यूक्रेन जाते हैं तो इससे रूस का चिढ़ना तय है। रूस आज भी वैश्विक महाशक्ति है। सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य भी है। इसके अलावा रूस रक्षा क्षेत्र में भारत का बड़ा साझीदार है। रूस अगर नाराज होता है तो कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत को झटका लग सकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी भी अधर में लटक सकती है।

चीन और पाक के साथ दोस्ती बढ़ा सकता है रूस
रूस की चीन के साथ भी गहरी दोस्ती है। 2020 के गलवान घाटी झड़प के दौरान रूस ने ही भारत और चीन के बीच मध्यस्थता की और तनाव को भड़कने से रोका। भारत और चीन में रिश्तों को काफी हद तक सामान्य बनाने में भी रूस ने बड़ी भूमिका निभाई। इतना ही नहीं, रूस तुरंत ही पाकिस्तान का समर्थन करना शुरू कर सकता है। पाकिस्तान पिछले कई साल से रूस पर डोरे भी डाल रहा है। ऐसे में अगर चीन और पाकिस्तान से रूस की नजदीकियां बढ़ती है तो यह भारत के लिए तगड़ा झटका होगा।

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