अक्सर जब कोई इंसान ओवरवेट (overweight) दिखता है, तो लोग यही कहते हैं कि खाने-पीने की वजह से उसका वज़न बढ़ा होगा। हालांकि, कई बार वज़न बढ़ने का कारण सिर्फ खान-पान नहीं होता। कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ और बीमारियाँ भी तेज़ी से वज़न बढ़ने (Rapid Weight Gain) की वजह बन सकती हैं। मोटापा कभी-कभी किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। इसलिए, इन समस्याओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और वज़न बढ़ने के असली कारण की पहचान करना बहुत ज़रूरी है। आइए जानते हैं उन बीमारियों के बारे में, जो तेज़ी से वज़न बढ़ाती हैं।
थायरॉइड (Hypothyroidism)
जब थायरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland) ठीक से काम नहीं करती, तो हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हो जाती है। थायरॉइड ग्रंथि शरीर के लिए ज़रूरी हार्मोन्स का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाती, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है। इसके अन्य लक्षणों में बालों का पतला होना, त्वचा का रूखापन और कब्ज़ शामिल हैं। अगर बिना वजह वज़न बढ़ रहा है, तो थायरॉइड की जाँच ज़रूर करवानी चाहिए।
नींद की कमी (Insomnia और Sleep Apnea)
पर्याप्त नींद लेना सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है, लेकिन नींद न आने की समस्या (Insomnia) या नींद में बार-बार रुकावट (Sleep Apnea) भी वज़न बढ़ने का कारण बन सकती है। स्लीप एपनिया के मरीज़ दिनभर थका हुआ और ऊबा हुआ महसूस करते हैं। पर्याप्त नींद न लेने पर शरीर में हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे खाने की इच्छा बढ़ती है और वज़न बढ़ने लगता है।
पीसीओएस (PCOS)
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं को प्रभावित करने वाली एक आम हार्मोनल समस्या है।2 इसमें अंडाशय (Ovaries) में छोटी-छोटी गांठें (Cysts) बनने लगती हैं। महिलाओं में अचानक वज़न बढ़ने का यह सबसे बड़ा कारण बन चुका है। PCOS से पीड़ित महिलाओं को वज़न नियंत्रित करने के लिए विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है।
कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (CHF)
जब दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पाता है, तो इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर कहते हैं। इस स्थिति में शरीर में पानी जमा (fluid retention) होने लगता है, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ता है। इसके साथ ही पैरों में सूजन, तेज़ धड़कन, सांस लेने में तकलीफ और हाई ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। वज़न में अचानक उछाल आने पर दिल की जाँच ज़रूर कराएं।
डायबिटीज (Diabetes)
डायबिटीज भी एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण वज़न बढ़ सकता है। खासकर इंसुलिन थेरेपी लेने वाले मरीज़ों में यह समस्या ज़्यादा दिखती है। हालांकि, सही दवाइयाँ, आहार और व्यायाम पर ध्यान देकर मोटापे को कम किया जा सकता है, जिससे डायबिटीज को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
