5.3 C
London
Monday, April 6, 2026
Homeराज्यसरकारों के गले की फांस बना सियासी गलियारे का फेवरेट सब्जेक्ट 'अवैध...

सरकारों के गले की फांस बना सियासी गलियारे का फेवरेट सब्जेक्ट ‘अवैध खनन’

Published on

नई दिल्ली

हरियाणा के मेवात से एक खबर आ रही है कि वहां खनन माफियाओं ने डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई की हत्या कर दी। डिप्टी एसपी सुरिंदर सिंह अवैध खनन के खिलाफ माफियाओं पर कार्रवाई करने गए थे और माफियाओं ने उनके ऊपर ही ट्रक चढ़ा दिया। आज के लिए यह बहुत बड़ी घटना है, लेकिन खनन के इतिहास में ऐसी घटनाओं की भरमार है। आरोप लगते रहे हैं कि खनन माफियाओं पर अब तक काबू नहीं पाने की सबसे बड़ी वजह ये है कि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिलता है। खैर, किसकी मिलीभगत से ये सब हुआ है, जांच के बाद यह पता चल ही जाएगा। खनन सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में जगह-जगह खनन होता है। कहीं मिट्टी, बालू और पत्थर का अवैध खनन होता है तो कहीं लौह अयस्क, चूना पत्थर और कोयले का खनन होता है। सवाल ये है कि आखिर ये रैकेट कितना बड़ा है और इसका इतिहास क्या है। आइए खनन के काले धंधे पर डालते हैं एक नजर।

कैसे काम करते हैं खनन माफिया?
भले ही खनन माफिया सुनकर आपके मन में हथियारबंद लोगों से घिरे एक अंडरवर्ल्ड डॉन की तस्वीर सामने आती हो, लेकिन ऐसा है नहीं। यह माफिया दरअसल सरकार से कुछ जगह पर खनन की अनुमति लेते हैं, जिस पर वह एक तय टैक्स भी चुकाते हैं। लेकिन बाद में वह एक बड़े इलाके में अतिक्रमण कर लेते हैं और मोटा मुनाफा कमाना शुरू कर देते हैं। यही होता है खनन माफिया के काम का तरीका जो लगभग हर जगह एक जैसा ही होता है। यही वजह है कि जब भी खनन माफिया से जुड़ी कोई घटना सामने आती है तो यह आरोप लगता ही है कि उन्हें सत्ता और अधिकारियों का संरक्षण मिला है।

सियासी गलियारे का फेवरेट सब्जेक्ट है अवैध खनन
अवैध खनन एक ऐसा मुद्दा है, जिसे आज तक कोई भी सरकार नहीं रोक पाई है। यहां तक कि आए दिन कोई न कोई खनन माफिया का शिकार होता है, लेकिन न तो पुलिस कुछ कर पाती है ना ही सरकारें कोई सख्त फैसला ले पाती हैं। अवैध खनन के मुद्दे पर ही एक बार गोवा में कांग्रेस चुनाव हार गई थी और भाजपा सत्ता में आई। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने विधानसभा में यह बात स्वीकार की थी कि सरकारी कोशिशों के बावजूद गोवा में अवैध खनन जारी है। उन्होंने साफ कहा था कि इसमें खनन विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। अवैध खनन हर सरकार के गले की फांस बन चुका है, जिससे कोई भी निजात नहीं दिला पा रहा है।

6 हजार साल पुराना है खनन का इतिहास
भारत में खनन का इतिहास करीब 6 हजार साल पुराना है। आजादी के बाद देश के विकास में खनिजों की अहमियत समझ आई और सरकार ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया। 1956 में एक औद्योगित नीति प्रस्ताव लाया गया, जिसके तहत उद्योगों के लिए खनिजों की जरूरत महसूस की गई। सबसे अहम खनिज है कोयला, जिसका तमाम जगह इस्तेमाल होता है। नई खनिज नीति 1993 के तहत खनिज क्षेत्र को निजी भागादारी में बढ़ाने के लिए एफडीआई के लिए खोल दिया गया। भारत में ‘खान और खनिज विकास और नियमन कानून 1997’ और ‘खान कानून 1952’ खनन से जुड़े बुनियादी कानून हैं। 1994 में कानूनों का संशोधन किया गया। साथ ही राज्य सरकारों को खनन के लिए पट्टे का अधिकार दिया गया। 1999 में फिर से एफडीआई बढ़ाने के लिए कानून में कुछ संशोधन हुए। 24 अप्रैल 2000 को कोयला खान, राष्ट्रीय विधेयक 1973 को संशोधित करते हुए कोयला क्षेत्र को भी निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया।

Latest articles

उत्पादन लक्ष्य पूर्ति पर भेल के कार्यपालक निदेशक को दी बधाई

भेल। भेल भोपाल के कार्यपालक निदेशक से सौजन्य मुलाकात कर फायनेंशियल वर्ष 2025-2026 के...

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की

विधानसभा में हुआ पुष्पांजलि कार्यक्रम भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व...

काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित हुई विश्व की प्रथम “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर उज्जैन के बाद अब बाबा विश्वनाथ के धाम...

ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच मप्र के 5000 पर्यटकों ने कैंसल किए UAE टूर, ₹25 करोड़ का कारोबार प्रभावित

भोपाल। ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर घूमने जाने वाले पर्यटकों पर...

More like this

छत्तीसगढ़ माओवादी आतंक से मुक्त, ऐतिहासिक उपलब्धि : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्णतः माओवादी आतंक...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘सरस’ को नेशनल ब्रांड बनाने और धार्मिक स्थलों पर आउटलेट खोलने के दिए निर्देश

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि डेयरी क्षेत्र राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था...

मिशन हरियालो राजस्थान: मानसून में 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य, सीएम भजनलाल शर्मा ने दिए ‘नमो वन’ और ‘चंदन वन’ को गति देने के...

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान को हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ शनिवार...