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सिब्बल, सिंघवी, रोहतगी… किसी की नहीं चली, जजों ने सिखाया संविधान की प्रस्तावना का पाठ

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नई दिल्‍ली

सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के प्रावधानों पर मुहर लगाते हुए बड़े-बड़े वकीलों की दलीलों को खारिज किया। प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों का विरोध करने कपिल सिब्‍बल, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी जैसे नामी वकील उतरे थे। 240 से ज्‍यादा याचिकाकर्ताओं की तरफ से बड़े-बड़े वकीलों की फौज थी। सुप्रीम कोर्ट के आगे इन सबकी दलीलें बेकार गईं। SC ने PMLA के तहत अरेस्‍ट, कुर्की और जब्‍ती से जुड़ी ED के अधिकारों को बरकरार रखने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि PMLA की धारा 19 के प्रावधानों में कुछ भी ‘मनमानी के दायरे में नहीं आता।’ अदालत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का देशों की संप्रभुता पर सीधा असर पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि देश के ‘आर्थिक ढांचे’ को नुकसान पहुंचाने से बचाने की खातिर राज्‍य के लिए ऐसे कानून बनाना जरूरी हो जाता है। अदालत ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक‍ और राजनीतिक न्‍याय देना राज्‍य का कर्तव्‍य है। ‘सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय’ की बात भारतीय संविधान की प्रस्‍तावना में कही गई है।

PMLA के खिलाफ कौन-कौन से वकील उतरे थे?
PMLA के प्रावधानों की वैधता को चुनौती देती 241 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्‍वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच के सामने नामी वकील पेश हुए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्‍बल, सिद्धार्थ लूथरा, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी, अमित देसाई, मेनका गुरुस्‍वामी, एस निरंजन रेड्डी, आबाद पांडा, सिद्धार्थ अग्रवाल, महेश जेठमलानी, विक्रम चौधरी जैसे वरिष्‍ठ वकीलों ने जिरह की। इसके अलावा अभिमन्‍यु भंडारी, एन हरिहरन और अक्षय नागराजन जैसे एडवोकेट्स भी कुछ याचिकाकर्ताओं के लिए पेश हुए। वहीं, भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और पैनल काउंसल कनु अग्रवाल पेश हुए।

545 पन्‍नों के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की अह‍म टिप्‍पणियां
धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 द्वारा परिकल्पित विशेष तंत्र के मद्देनजर सीआरपीसी के तहत किसी ईसीआईआर को एफआईआर से नहीं जोड़ा जा सकता है।
पीएमएलए की धारा-45 संज्ञेय तथा गैर-जमानती अपराधों से संबंधित है और यह उचित है और मनमानीपूर्ण नहीं है।
2002 अधिनियम की धारा 19 की संवैधानिक वैधता को दी गई चुनौती भी खारिज की जाती है। धारा 19 में कड़े सुरक्षा उपाय दिए गए हैं। प्रावधान में कुछ भी मनमानी के दायरे में नहीं आता।
अधिनियम की धारा-5 के तहत धनशोधन में संलिप्त लोगों की संपति कुर्क करना संवैधानिक रूप से वैध है।
पीएमएलए की धारा 24 का अधिनियम द्वारा हासिल किए जाने वाले उद्देश्यों के साथ उचित संबंध है और इसे असंवैधानिक नहीं माना जा सकता है।
सीआरपीसी की धारा 162 में कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति पुलिस अधिकारी द्वारा पूछे गए सभी सवालों का सच्चाई से जवाब देने के लिए बाध्य है।
2002 के अधिनियम के तहत अधिकारियों द्वारा दर्ज किए गए बयान संविधान के अनुच्छेद 20 (3) या अनुच्छेद 21 से प्रभावित नहीं हैं।
अनुच्छेद 20 (3) के अनुसार किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है।
PMLA, 2002 के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण में रिक्तियों के संबंध में कार्यपालिका को सुधारात्मक उपाय करने की जरूरत है।
अधिनियम की धारा 63, जो झूठी सूचना या सूचना देने में विफलता के संबंध में सजा से संबंधित है, किसी भी तरह से मनमानीपूर्ण नहीं है।
धारा 44 को चुनौती देने में कोई आधार नहीं दिखता है, जो विशेष अदालतों द्वारा विचारणीय अपराधों से संबंधित है, जो मनमाना या असंवैधानिक है।

पीएमएलए की अहमियत
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) में कई ऐसे प्रावधान हैं जो इसे सख्त ऐक्ट बनाता है। मसलन, एफआईआर दर्ज हुए बगैर भी सर्च का अधिकार दे दिया गया है। जैसे ही ईसीआईआर (इन्फॉर्समेंट केस इनफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज होती है, आरोपी की जो भी संपत्ति है, उसे जब्त करने का अधिकार मिल जाता है। संपत्ति तब तक जब्त रहती है, जब तक आरोपी बरी न हो जाए। आरोपी को पता नहीं चल पाता कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी के लिए एजेंसी के पास क्या आधार है। ईडी अधिकारी समन की कार्रवाई के दौरान भी आरोपी को हिरासत में ले सकते हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि अब तक 4,700 केसों में छानबीन हुई है और 338 केस दर्ज हुए हैं। साथ ही 313 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। एफआईआर और चार्जशीट से पहले जो भी संपत्ति अटैच की जाती है, उसके लिए पर्याप्त सेफगार्ड हैं। अगर संपत्ति अटैच की जाती है तो ईडी अधिकारी उसकी जरूरत और आधार बताते हैं।

फिलहाल किन नेताओं के खिलाफ सक्रिय है ईडी?
कांग्रेस पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, पी चिदंबरम, उनके बेटे एवं सांसद कार्ति चिदंबरम, शिवसेना के नेता संजय राउत, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन सहित कई शीर्ष विपक्षी नेता कथित मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर ईडी जांच का सामना कर रहे हैं।

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