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नीतीश राज में पार्टी छोड़ी, पद को मारी लात… नई सरकार में खाली हाथ रहे कुशवाहा को क्यों याद आ रहा अतीत

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पटना

जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि मेरे लिए पद नहीं, मिशन बड़ा है। आइडियालॉजी बड़ी है। आज की तारीख में पार्टी संगठन के लिए काम करना हमारे लिए सबसे बड़ा धर्म है। यही नहीं, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने फेसबुक पोस्ट में इतिहास की भी बात की। उन्होंने लिखा कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी पद नहीं मिलने पर उपेंद्र कुशवाहा ने नाराजगी नहीं जताई, बल्कि कई बार अपनी नाराजगी जताने के लिए बड़े-बड़े पदों को लात जरूर मारी है।

इतिहास की बात क्यों करने लगे कुशवाहा
दरअसल, कुछ दिनों से बिहार के सियासी गलियारे में यह सवाल तेजी से उठ रहे हैं कि नीतीश मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने की वजह से उपेंद्र कुशवाहा नाराज हैं। इतना ही नहीं, पिछले मंगलवार को मंत्रिमंडल विस्तार होने वाला था, लेकिन ठीक उसके एक दिन पहले ही उपेंद्र कुशवाहा बिहार से बाहर चले गए। उपेंद्र कुशवाहा का बिहार से बाहर जाना, कई और सवालों को जन्म दे दिया। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा चुप रहे। कैबिनेट विस्तार के बाद उन्होंने ट्वीट कर शपथ लेने वाले सभी मंत्रियों को बधाई जरूर दी। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने जिस तरह से अपनी बात रखी थी, उससे सवाल उठने लगे थे कि उन्होंने बधाई दी है या फिर सीएम नीतीश कुमार को नसीहत दी? इसी बीच सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें तैरने लगी, बावजूद इसके उपेंद्र कुशवाहा चुप रहे।

8 दिन बाद सोशल मीडिया पर दिया जवाब
शनिवार को उपेंद्र कुशवाहा फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा। अपनो पोस्ट में उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा कि बिहार से बाहर होने के कारण मेरे बारे में अनेक तरह की भ्रामक एवं अनाप-शनाप खबरें प्रचारित की गई है और की जा रही है। ऐसी अनर्गल बातों को हवा देने वाले महानुभावों को यह मालूम होना चाहिए कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी पद नहीं मिलने पर उपेंद्र कुशवाहा ने नाराजगी नहीं जताई, बल्कि कई बार अपनी नाराजगी जताने के लिए बड़े-बड़े पदों को लात जरूर मारी है। इतिहास गवाह है मेरे लिए पद बड़ा नहीं, मिशन बड़ा है, आइडियोलॉजी बड़ी है।

खास मिशन से जेडीयू में कराया अपनी पार्टी का विलय
उपेंद्र कुशवाहा ने आगे लिखा है कि आइडियोलॉजी को बर्बाद करने की हो रही साजिश को नाकाम करने के एक खास मिशन से मैंने अपनी पार्टी का विलय जेडीयू में करने का फैसला लिया। क्योंकि हमारे सभी साथियों का निष्कर्ष था और है कि राज्य ही नहीं पूरे देश के स्तर पर नीतीश कुमार एक मात्र ऐसे कर्मठ, अनुभवी और साफ छवि के नेता हैं, जिनके नेतृत्व में इस विचार धारा को बचाया और बढ़ाया जा सकता है।

संगठन में काम करना सबसे बड़ा धर्म
उपेन्द्र कुशवाहा ने आगे लिखा कि मैं यह बात एलानिया तौर पर कहना चाहता हूं कि आज की तारीख में पार्टी संगठन के लिए काम करना हमारे लिए सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे में मेरा पक्ष जाने बिना मंत्री नहीं बनने पर नाराज होने की बात करने वाले महानुभावों, मुझ पर कृपा कीजिए, प्लीज।

अचानक इतिहास की बात क्यों?
उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि अपनी नाराजगी जताने के लिए बड़े-बड़े पदों को लात जरूर मारी है। इतिहास गवाह है, मेरे लिए पद बड़ा नहीं, मिशन बड़ा है। उपेंद्र कुशवाहा कहना क्या चाहते हैं, वो तो वही बता सकते हैं। लेकिन उनके पोस्ट से समझा झा सकता है कि इशारा किस ओर है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपेन्द्र कुशवाहा के सियासी रिश्ते कैसे रहे हैं, ये सभी जानते हैं। समय के साथ-साथ दोनों के रिश्ते भी बदलते रहे हैं। कभी नीतीश के पास तो कभी दूर। शायद उपेंद्र कुशवाहा पत्रकारों को संदेश देते-देते ये भी बताने की कोशिश किया है कि उनका इतिहास भी जान लीजिए।

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