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Friday, March 13, 2026
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CM हेमंत सोरेन की विधायकी जाने पर हो गया फैसला, राज्यपाल के सिग्नल का है इंतजार

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रांची

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता से अयोग्यता के मसले पर भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी सुनवाई पूरी कर ली है और जल्द ही राज्यपाल को अपनी राय भेजने की तैयारी में है। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे का दावा है चुनाव आयोग की ओर से रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी गयी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से रांची के अनगड़ा में पत्थर खनन लीज मामले में बीजेपी नेताओं ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग राज्यपाल से की थी।

बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत अन्य बीजेपी नेताओं की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भारत के संविधान के अनुच्देद 191 (ई) के साथ-साथ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9 (ए) के तहत पत्थर खनन का पट्टा प्राप्त करने के लिए अयोग्य किया जाना चाहिए। बीजेपी नेताओं की इस शिकायत के बाद राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत चुनाव आयोग से परामर्श मांगा था।

आयोग ने सीएस से रिपोर्ट मिलने पर सीएम को जारी किया था नोटिस
राज्यपाल के परामर्श मांगने के बाद चुनाव आयोग की ओर से मुख्य सचिव से भी रिपोर्ट मांगी गयी। मुख्य सचिव की ओर से खनन लीज के मामले में अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंप दी गयी, जिसके बाद आयोग की ओर से सीएम हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर पूछा गया कि क्यों नहीं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएं। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अपना पक्ष अधिवक्ता के माध्यम से चुनाव आयोग में रखने का काम किया गया।हेमंत सोरेन के वकील ने आयोग के समक्ष दलीलें रखे जाने के दौरान कहा कि मामला लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए के तहत नहीं आता है, जो सरकारी अनुबंधों के लिए अयोग्यता से संबंधित है। निर्वाचन आयोग ने 18 अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली है। अब आयोग अपनी राय से झारखंड के राज्यपाल को अवगत करायेगा।

आयोग के परामर्श पर राज्यपाल का निर्णय अंतिम
संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या किसी राज्य के विधानमंडल के सदन का कोई सदस्य किसी अयोग्यता के अधीन हो गया है, तो इस मामले राज्यपाल को भेजा जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम होगा। इसके अनुसार इस तरह के किसी भी प्रश्न पर कोई निर्णय देने से पहले राज्यपाल निर्वाचन आयोग से राय प्राप्त करेंगे और उसकी राय के अनुसार करेंगे। इसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई चल रही है और अब सभी को आयोग के परामर्श का इंतजार है।

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