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ट्रैक्टर-बाइक और पैदल चाल, फसलों की मनचाही एमएसपी नहीं मिलने पर किसानों की आक्रोश रैली, सरकार को दी ये चेतावनी

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खंडवा

मध्य प्रदेश में सरकार ने किसानों की मांग पर सोयाबीन पर एमएसपी बढ़ा दी है। सरकार अब किसानों से सोयाबीन 4892 रु प्रति क्विंटल पर खरीदने की घोषणा की है। इसके बाद भी एमपी में किसानों का विरोध प्रदर्शन नहीं थम रहा है। ताजा मामला खंडवा जिले से सामने आया है, जहां सोयाबीन के सही दाम नहीं मिलने से नाराज किसानों ने सोमवार को आक्रोश रैली निकली। किसान अभी भी एमएसपी 6000 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।

एमएसपी बढ़ाने के लिए आज जिले के 300 से ज्यादा गांवों के 6-7 हजार किसान सब्जी मंडी में इकट्ठा हुए। फिर 1 हजार से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर शहर की सड़कों से गुजरे। किसानों की मांग है कि सरकार ने जो सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4892 तय किया है, लेकिन इससे ज्यादा किसानों इसमें खर्चा आता है। इससे उनका खर्च नहीं निकल पता है।

10 सालों में भी नहीं बढ़ी एमएसपी
विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि पिछले कई सालों में महंगाई बढ़ी है लेकिन 2015 में जो सोयाबीन का भाव था आज 2024 में भी उसी दाम में बिक रही है। इसलिए किसानों की मांग है कि सोयाबीन के दाम 6 हजार रु, मक्का 2500 रुपए, कपास 10 हजार रु और गेहूं 3500 रुपए प्रति क्विंटल किए जाएं। एमएसपी बढ़ाने के लिए हजारों की संख्या में किसानों ने आक्रोश रैली निकाली।

सब्जी मंडी से कलेक्टर तक निकाली रैली
ये रैली सब्जी मंडी से शुरू हुई जो शहर के नगर निगम से होते हुए बॉम्बे बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची। यहां किसान संघ के बैनर तले पीएम को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों की मांग है कि वर्तमान में सोयाबीन की फसल आने वाली है। ऐसे में आवक बढ़ने पर सोयाबीन के भाव और काम हो जाएंगे। इससे किसानों को अपनी लागत भी निकलना मुश्किल हो रहा है। सरकार को चाहिए की सोयाबीन की एमएसपी 6000 रूपए से ज्यादा तय करें ताकि किसानों इसका लाभ मिले।

बड़े-बड़े आंदोलन होंगे
किसान की आक्रोश रैली में शामिल हुए भारतीय किसान संघ के महामंत्री सुभाष पटेल ने कहा कि आज एमपी के पूरे 52 जिलों में एक साथ आंदोलन है और मेन मांग है फसलों का भाव। जिस प्रकार हमारी फसल मंडी में आती है तो उसके भाव पानी की बाटल के भाव से भी नीचे हो जाते हैं। यदि आपने जो वादा पूरा नहीं किया तो उसका परिणाम देखने को मिलेगा। मंडी तभी खुलेगी जब अच्छे भाव मिलेगा ये अभी केवल चेतावनी है। यदि सरकार ने औने पौने दाम में फसल खरीदी तो इस बार बड़े बड़े आंदोलन होंगे।

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