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इन 6 लापरवाहियों से मौत का पुल बन गया मोरबी का हैंगिंग ब्रिज

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मोरबी,

गुजरात के मोरबी में केबल ब्रिज हादसे में अब तक 135 लोगों की मौत हुई है. इस पूरे हादसे के पीछे लापरवाही को बड़ी वजह माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि ब्रिज के मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति हुई. न तो जंग लगा पुराना केबल बदला गया. न ही ठीक से फ्लोर प्लेट फिक्स किया गया. कंपनी को 8-12 महीने के मेंटेनेंस के बाद ये ब्रिज खोलना था, लेकिन कंपनी ने इसे 7 महीने में ही खोल दिया. इतना ही नहीं कंपनी द्वारा न ही फिटनेस सर्टिफिकेट लिया गया और न ही प्रशासन से किसी तरह की कोई अनुमति.

मोरबी नगरपालिका ने अजंता कंपनी (ओरेवा) से मेंटेनेंस के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया था. इसके मुताबिक, कंपनी को पुल का 8-12 महीने तक मेंटेनेंस करना था, इसके बाद इसे खोला जाना था. बताया जा रहा है कि कंपनी ने कथित तौर पर इसका रेनोवेशन का ठेका थर्ड पार्टी (देव प्रकाश सॉल्यूशन) को दिया. कंपनी ने मोरबी पुल के रेनोवेशन का काम किया. लेकिन इसे समय से पहले ही खोल दिया गया. ब्रिज 5 दिन तक खुला रहा, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई.

सामने आईं ये बड़ी लापरवाहियां
ब्रिज की मरम्मत 2 करोड़ रुपए में हुई थी. मरम्मत के नाम पर ब्रिज पर पेंट किया गया था. इसके अलावा ब्रिज की प्लेट्स बदली गई थीं. कुछ और छोटा मोटा काम भी किया गया था. आज तक की टीम जब मौके पर पहुंची, तो बड़ी लापरवाहियां देखने को मिलीं.

1- केबल ब्रिज के एंकर में जो क्लिप लगी थीं, उनमें जंग थी.
2- मरम्मत के वक्त जंग लगा पुराना केबल भी नहीं बदला गया.
3- बोल्ट इतने कमजोर थे कि भीड़ के वजन से टेढ़े पड़ गए.
4- केबल भी भीड़ के वजन को नहीं सह सका.
5- कंपनी ने लकड़ी के फ्लोर की जगह एल्युमिनियम की प्लेट का इस्तेमाल किया था लेकिन ये ठीक से फिक्स नहीं की गईं.
6- ब्रिज में फिसलन वाली प्लेट का इस्तेमाल किया गया था.

तकनीकी और संरचनात्मक खामियां हादसे की वजह- गुजरात पुलिस
इससे पहले गुजरात पुलिस ने भी माना है कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि तकनीकी और संरचनात्मक खामियां और मेंटेनेंस में कमी मोरबी हादसे की वजह हैं. समाचार एजेंसी के मुताबिक, राजकोट आईजी अशोक कुमार यादव ने बताया कि पुलिस इस मामले में जांच के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और इंजीनियर्स की मदद ले रही है. अशोक कुमार यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि सर्टिफिकेशन के साथ मेंटेनेंस में कमी और तकनीकी और संरचनात्मक खामियां ब्रिज हादसे की वजह हैं.

अब तक मामले में क्या क्या हुआ?
मोरबी में रविवार शाम 6.30 बजे केबल ब्रिज टूट गया था. हादसे के वक्त ब्रिज पर 300-400 लोग मौजूद थे. इनमें से 135 लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने इस मामले में ओरेवा कंपनी के चार कर्मचारियों समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से दो कंपनी के मैनेजर, जबकि दो टिकट क्लर्क हैं. 5 अन्य कर्मचारियों में 2 को ओरेवा कंपनी द्वारा हायर कॉन्ट्रैक्टर्स हैं, जबकि तीन गार्ड हैं. इन पर आईपीसी की धारा 304 और 308 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने इस मामले में मेंटेनेंस कंपनी पर भी मामला दर्ज किया है.

143 साल पुराना था ब्रिज
मोरबी की शान कहलाए जाने वाला केबल ब्रिज 143 साल पुराना था. 765 फुट लंबा और 4 फुट चौड़ा ये पुल एतिहासिक होने के कारण गुजरात टूरिज्म की लिस्ट में भी शामिल किया गया था. आजादी से पहले ब्रिटिश शासन में मोरबी ब्रिज का निर्माण किया गया था. मच्छु नदी पर बना यह ब्रिज मोरबी का प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट था. मोरबी के राजा वाघजी रावजी ने केबल ब्रिज (झूलता हुआ पुल) बनवाया था. जिसका उद्घाटन 1879 में किया गया था. ब्रिटिश इंजीनियरों के द्वारा बनाए गए इस पुल के निर्माण में आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल किया गया था.

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