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राजीव गांधी की हत्या के दोषी फिर जेल जाएंगे? सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा केंद्र

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नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने राजीव गांधी के हत्या में दोषियों को रिहा करने के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला किया है। ऐसे में सवाल है कि क्या राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी फिर से जेल के भीतर जाएंगे? दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजीव गांधी हत्याकांड के 6 दोषियों को तीन दशक जेल में बिताने के बाद 12 नवंबर को रिहा कर दिया था। रिहा होने वालों में चार श्रीलंकाई के साथ ही नलिनी श्रीहरन और रविचंद्रन शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में नलिनी, उसके पति श्रीहरन और दो अन्य को मौत की सजा की पुष्टि की थी। तमिलनाडु सरकार ने 2000 में नलिनी की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती विस्फोट में हत्या कर दी गई थी।

‘राजीव गांधी के हत्या की जानकारी नहीं थी’
राजीव गांधी हत्याकांड की दोषी एस. नलिनी ने रिहा होने के बाद कहा था कि उसे पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के प्रयास की जानकारी नहीं थी। नलिनी ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के परिवार से मिलना चाहती है। उसने कहा कि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि राजीव गांधी की हत्या की जा रही है। वह वास्तव में राजीव गांधी की हत्या से दुखी थी।

श्रीलंका भेजे जाएंगे रिहा हुए चार लोग
राजीव गांधी हत्या मामले में हाल ही में रिहा किए गए चार श्रीलंकाई दोषियों को निर्वासित (डिपोर्ट) करने का आदेश 10 दिनों में आने की उम्मीद है, चारों अभी पुनर्वास शिविर में हैं। तिरुचि के जिला कलेक्टर एम. प्रदीप कुमार के अनुसार प्रक्रिया के अनुसार, संबंधित देश को एक संदेश भेजा जाएगा। देश यह सत्यापित करने के बाद जवाब देगा कि वह इसके नागरिक हैं या नहीं। इस के आधार पर, विदेशी नागरिकों को भारत से निर्वासित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्वासन आदेश 10 दिनों के भीतर प्राप्त होने की संभावना है।

तमिलनाडु के साथ श्रीलंका में स्लीपर सेल एक्टिव
राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई तमिलनाडु और श्रीलंका में लिट्टे के पुनरुद्धार के लिए एक ट्रिगर बन सकती है। पुलिस और एजेंसियों ने इस बात की आशंका जताई है। खुफिया सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि तमिलनाडु के साथ-साथ श्रीलंका में कई लिट्टे स्लीपर सेल हैं और दोषियों की रिहाई से उनकी गतिविधि बढ़ सकती है, क्योंकि लिट्टे के कुछ पूर्व गुर्गे अभी भी तमिल राष्ट्र की महत्वाकांक्षा रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. अन्नपूर्णा सुंदरेशन ने कहा कि तमिल राष्ट्रवाद और तमिल आंदोलन लिट्टे से शुरू नहीं हुए और न ही लिट्टे के साथ समाप्त हुए।

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