नई दिल्ली/भोपाल। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक और सरकारी स्वामित्व वाली महारत्न कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड के अगले अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के चयन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम और बेहद दिलचस्प दौर में पहुंच चुकी है। वर्तमान प्रमुख गुरदीप सिंह का विस्तारित कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हो रहे इस शीर्ष पद के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित विशेष सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटीने कुल 18 उम्मीदवारों के नामों को शॉर्टलिस्ट किया है।
लोक उद्यम चयन बोर्ड द्वारा पूर्व में किसी उपयुक्त नाम पर मुहर न लगा पाने के बाद केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा इस सर्च कमेटी का गठन किया गया था। इस बार चयन समिति ने सरकारी उपक्रमों (PSUs) के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अनुभवी दिग्गजों को भी रेस में शामिल कर मुकाबले को बेहद कड़ा बना दिया है। शॉर्टलिस्ट की गई इस हाई-प्रोफाइल सूची में एनटीपीसी के ही अपने 8 शीर्ष अधिकारियों का दबदबा है, जिसमें कंपनी के वर्तमान निदेशक शिवम श्रीवास्तव सहित 7 अन्य कद्दावर कार्यकारी निदेशक सुपेन्द्र पांडा, देवाशीष पांडा, विजय चंद, अशोक सहगल, सरित माहेश्वरी, एल के बेहरा और अजय कुमार शुक्ला शामिल हैं। इन आंतरिक उम्मीदवारों के अलावा, देश की अन्य दिग्गज तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों ने भी इस पद के लिए मजबूती से अपनी दावेदारी पेश की है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से कंपनी के निदेशक अनुज जैन सहित तीन कार्यकारी निदेशक (मनोज शर्मा, अजीत ठाकुर, हेमंत राठौर) शॉर्टलिस्ट हुए हैं, जबकि गेल से कार्यकारी निदेशक अतुल कुमार त्रिपाठी, पावर ग्रिड ( से पंकज पांडा और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से हेमंत दास रेस में बने हुए हैं। इस पूरी चयन प्रक्रिया का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आकर्षण निजी क्षेत्र और प्रशासनिक सेवा के चेहरों की एंट्री है। सर्च कमेटी ने देश की प्रतिष्ठित निजी ऊर्जा कंपनी टाटा पावर (टाटा पावर रिन्यूएबल्स) के प्रबंध निदेशक दीपेश नंदा को भी इस शीर्ष पद की दौड़ में शामिल किया है, जो यह दर्शाता है कि सरकार एनटीपीसी के भविष्य के नेतृत्व के लिए निजी क्षेत्र के विजन और प्रतिस्पर्धी कॉर्पोरेट अनुभव को भी गंभीरता से विचार में ले रही है।
इसके साथ ही, झारखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव नितिन कुलकर्णी तथा गुजरात ऊर्जा विकास निगम के निदेशक कमलेश कुमार जांगिड़ भी इस सूची में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। अब उद्योग जगत और प्रशासनिक हलकों की नजरें चयन समिति के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि देश की इस ऊर्जा महाशक्ति की कमान किसके हाथों में सौंपी जाती है।
