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Tuesday, April 7, 2026
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असम के राज्यपाल बन सीएम की रेस से बाहर हुए गुलाबचंद कटारिया, बदल सकते हैं बीजेपी के समीकरण

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जयपुर

राष्ट्रपति ने रविवार सुबह 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल और उपराज्यपाल बदलने के आदेश दिए हैं। इसी कड़ी में राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाया गया है। ऐसे में अब वह सक्रिय राजनीति में नहीं रहेंगे। कटारिया को राज्यपाल नियुक्त करने पर राजस्थान में उनके प्रशंसकों ओर बीजेपी नेताओं ने खुशी जताई है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी फोन कर कटारिया को बधाई दी है।

पूर्व CM वसुंधरा राजे ने दिया पीएम मोदी को धन्यवाद
राजस्थान के LoP गुलाब चंद कटारिया के असम के राज्यपाल बनाए जाने पर राज्य की पूर्व CM वसुंधरा राजे ने कहा, “गुलाब चंद कटारिया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शुरूआत में प्रतिद्वंद्वी थे लेकिन अब मैं PM को धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने राज्यपाल के तौर पर इतने अनुभवी और संजिदा व्यक्ति को चुना। विधानसभा के अंदर उन्होंने हमेशा पार्टी का पक्ष रखा, उन्हें हम बहुत याद करेंगे।”

बीजेपी को अब विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष चुनना होगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से गहराई से जुड़े 78 वर्षीय गुलाब चंद कटारिया राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं। वह राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली कई सरकारों में गृहमंत्री भी रहे हैं। गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल नियुक्त किये जाने के बाद पार्टी को अब विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष चुनना होगा। नया नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में कई नाम हैं जिसमें सबसे पहला नाम वसुंधरा राजे का है। सदन में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का भी नाम चर्चा में है। इसके सासत ही जागेश्वर गर्ग और मदन दिलावर का नाम भी चर्चा में है।

नए नेतृत्व के लिए रास्ता बनाने की भाजपा की रणनीति
आठ बार विधायक रहे गुलाब चंद कटारिया को राजस्थान की सक्रिय राजनीति से हटाया जाना राज्य में एक नए नेतृत्व के लिए रास्ता बनाने की भाजपा की रणनीति लगती है। इस साल के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव है। गुलाब चंद कटारिया भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे थे। ऐसे में उपराज्यपाल बनाने का फैसला पहली नजर में बताता है कि वह 2023 में मुख्यमंत्री के दावेदारों की दौड़ से बाहर हो गए हैं। दक्षिण राजस्थान के मेवाड़-वागड़ क्षेत्र में गुलाब चंद कटारिया का प्रभाव माना जाता है। मेवाड़ की 40-50 सीटों पर आदिवासियों, राजपूतों और जैन समुदाय का वर्चस्व है। ये सीटें राज्य के आगामी चुनावों में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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