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Wednesday, April 15, 2026
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राजस्थान के 1000 साल पुराने मंदिरों में मिला ‘खजाना’, पुरातत्व विभाग अब शुरू करेगा खुदाई

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टोंक

राजस्थान​ के टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में प्राचीन विरासत का खजाना मिला है। ये खजाना प्राचीन गोपीनाथ मंदिर समेत आसपास के मंदिरों से निकला है। यहां इतिहास के कई ऐसे रहस्य दबे हुए मिले जिनसे लोग अब तक वाकिफ नहीं है। दरअसल, यहां गोपीनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान अति महत्वपूर्ण अवशेष मिले थे। प्राचीन मूर्तियों और अवशेषों को देखकर न केवल यहां के लोग चकित थे ब्लकि पुरातत्व विभाग भी हैरान था। अब विभाग ने भी करीब एक हजार साल पुराने इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए अपना मन बना लिया है। अब अगले सप्ताह तक पुरातत्व विभाग की ओर से यहां खुदाई का कार्य किया जाएगा। जिससे कई रहस्य सामने आ सकेंगे।

मंदिर परिसर की खुदाई में मिली प्राचीन गणेश मूर्ति
गोपीनाथ मंदिर परिसर में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य के दौरान लोग उस समय आश्चर्यचकित हो गए। जब खुदाई के समय प्राचीन गणेश प्रतिमा मिली। इसके बाद जब वहां जानकार लोग मौके पर पहुंचे तो, उन्होंने संभावना जताई कि खुदाई के दौरान कई ऐसे रहस्य हैं। जिनसे पर्दा उठ सकता है। इसको लेकर पुरातत्व विभाग को भी अवगत कराया गया हैं। उधर, पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षण सहायक महेंद्र सिंह ने बताया कि गोपीनाथ मंदिर परिसर में खुदाई में मिली गणेश जी की प्रतिमा के बाद अब यहां और भी रहस्य उजागर होने की संभावनाएं बन रही है। इसको लेकर विभाग की ओर से विशेषज्ञों की निगरानी में मंदिर परिसर में खुदाई का कार्य अगले सप्ताह तक शुरू करवाया जाएगा।

प्राचीन जलाशय और तहखाने मिलने की संभावना
मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान कुछ ऐसे अवशेष व तथ्य मिले हैं। जिनसे वहां प्राचीन जलाशय, बावड़ी और कमरेनुमा तहखाने निकलने की संभावना बताई जा रही है। इस दौरान खुदाई में एक सुरंगनुमा गड्ढा भी मिला हैं। जिससे कई रहस्य उजागर हो सकते हैं। जानकार लोगों का कहना है कि अनदेखी और जागरूकता के अभाव में गोपीनाथजी मंदिर से जुड़ी हुई अन्य कृतियां, इमारतें भूगर्भ में समाहित हो चुकी है। जिनसे पर्दा हटाया जाना आवश्यक है।

नागवंश में टोडारायसिंह कस्बा रहा राजधानी
जानकार लोगों का कहना है कि टोडारायसिंह कस्बे का इतिहास काफी पुराना है। नागवंश से लेकर कई राजपूत वंशों के शासनकाल में टोडारायसिंह बड़ी रियासतों की राजधानी रही है। इसके चलते यह विशाल पत्थरों से निर्मित वास्तु शिल्प कला और बेजोड़ इमारतें हैं। जो मुगल काल में शासकों द्वारा विध्वंस कर दी गई।

मुगलकाल में ध्वस्त किए गए मंदिर
मुगलकाल में कई मंदिरों में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों को खंडित कर दिया गया। मुगलकाल के बाद टोडारायसिंह की विरासत लगातार अनदेखी का शिकार होती रही। लोगों के अतिक्रमण करने से यहां का स्वरूप बिगड़ गया है। लोगों ने इन प्राचीन इमारतों के क्षेत्र में जगह-जगह अतिक्रमण कर रखा है।

मुगल शासकों ने पहुंचाया मंदिराें को नुकसान
टोडारायसिंह में पुरातत्व विभाग के अनुसार कस्बे के माणक चौक स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर, श्री कल्याण जी मंदिर, कालाकोट राघवराय जी के मंदिर मुगल शासकों की आतताई का दंश झेल चुके हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार अब इन मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाना है। खुदाई के बाद यहां कई ऐसे रहस्य है। जो लोगों के सामने आ पाएंगे।

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