24.5 C
London
Friday, June 19, 2026
Homeराष्ट्रीय"हम जानते हैं लोकतंत्र के नाम पर क्या हो रहा है", क्रिमिनल...

“हम जानते हैं लोकतंत्र के नाम पर क्या हो रहा है”, क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Published on

नई दिल्ली

जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने सरकारी कार्यालयों में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार को रेखांकित करते हुए कहा, “एक राष्ट्र के रूप में विकसित होने के लिए हमें अपने मूल्यों की तरफ वापस लौटना होगा।”सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, “हम जानते हैं लोकतंत्र के नाम पर क्या हो रहा है, कैसी नौकरशाही है हमारी, चुप रहना ही बेहतर है… कोई टिप्पणी नहीं। एक राष्ट्र के रूप में विकसित होने के लिए सबसे पहले हमें मूल्यों की ओर लौटना होगा, हमें अपना कैरेक्टर हासिल करना होगा।

आप किसी भी सरकारी दफ्तर में चले जाइए। क्या देश का कोई भी नागरिक सरकारी कार्यालयों से बेदाग निकले सकता है? पश्चिमी देशों में चले जाइए, आम आदमी कभी भ्रष्टाचार से नहीं जुड़ा होता। यहां क्या होता है? यही मूल समस्या है। हमें अपने अच्छे चरित्र को फिर से हासिल करने की जरूरत है, इसके बिना कुछ नहीं हो सकता।” न्यायमूर्ति नागरत्न ने कहा कि सभी स्तरों पर जवाबदेही होनी चाहिए।

क्या है मामला?
यह चर्चा तब हुई जब पीठ उन लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए याचिका पर विचार कर रही थी जिनके खिलाफ गंभीर अपराधों में आरोप तय किए गए हैं। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने आंकड़े दिए कि पिछले वर्षों में आपराधिक मामलों में जिन राजनीतिक व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी, उनकी संख्या कैसे बढ़ रही है।

कोर्ट ने बताया कि पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा द्वारा लिखे गए एक फैसले में कहा गया है कि न्यायालय इसमें मदद नहीं कर सकता है। सरकार को इसके बारे में कुछ करना चाहिए। न्यायालय ने मौजूदा मुद्दे को “महत्वपूर्ण” करार देते हुए संघ को अपना प्रतिवाद दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से वकील अमित शर्मा पेश हुए थे।

वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने तर्क दिया कि मैं केवल उन लोगों के लिए कह रहा हूं जिनके खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। अगर राजनीतिक दल इन व्यक्तियों की आपराधिक पृष्ठभूमि का पता लगाने में सक्षम नहीं हैं, तो यह समस्या की बात है।जस्टिस नागरत्ना ने कहा, हमें ऐसे शिक्षकों की आवश्यकता है जो राष्ट्र के निर्माता हों। जस्टिस जोसेफ ने मामले में अंतिम सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख दी है।

Latest articles

मानसून की सुस्त चाल से चिंता बढ़ी; राज्य में बारिश में 39% की कमी, 39 ज़िलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

भोपाल। इस साल मध्य प्रदेश में मानसून की रफ़्तार धीमी रही है। आमतौर पर...

अमेरिका-ईरान जंग खत्म, तय तारीख से एक दिन पहले ही समझौता, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन हो गई

तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते...

MP में NEET परीक्षा के लिए हाई-सिक्योरिटी अलर्ट: CRPF की निगरानी में आएंगे पेपर; सेंटर्स पर लगेंगे जैमर और CCTV

भोपाल। मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 21 जून को आयोजित होने...

गोविंदपुरा पुलिस की तत्परता: 12 घंटे में ढूंढ निकाला ऑटो में छूटा 10 तोला सोना और 2 किलो चांदी, आई एस बी टी पर...

भोपाल। राजधानी में पुलिस की मुस्तैदी और ईमानदारी की एक अनोखी मिसाल सामने आई...

More like this

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका; क्रॉस वोटिंग और वोट रद्द होने से बदला पूरा समीकरण

रांची। झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव की मतगणना में बड़ा...

उद्धव की पार्टी टूटी, 9 में से 6 सांसद बागी; 4 साल पहले शिंदे 39 विधायकों के साथ अलग हुए थे

नई दिल्ली/मुंबई1 महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6...