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पेशाब पिलाने के मामले में केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल समेत 11 लोग बरी, जानिए पूरी कहानी

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आगरा

उत्तर प्रदेश के आगरा के थाना एत्मादपुर के 7 साल पुराने मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल, पूर्व सांसद प्रभुदयाल कठेरिया समेत 11 लोगों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने यह निर्णय साक्ष्यों के अभाव में दिया है। आरोपियों पर 2006 में युवक के साथ मारपीट और पेशाब पिलाने के विरोध में जनसभा करने का आरोप लगा था। इस मामले में धारा 144 के उल्लंघन के तहत अभियोजन दर्ज किया गया था।

कस्बे के मुस्लिम खान आदि पर आरोप था कि 5 अप्रैल 2016 को कस्बे के नरोत्तम सिंह बघेल के साथ मारपीट की और आपत्तिजनक हरकत (पेशाब पिलाने ) की थी। इसके विरोध में एसपी सिंह बघेल ने 8 अप्रैल 2016 को महापंचायत करने का एलान किया था। इस संबंध में तत्कालीन एत्मादपुर थानाध्यक्ष ब्रह्म सिंह ने 11 अप्रैल को अपने उच्चाधिकारियों को धारा 144 के उल्लघंन के बारे में अवगत कराया। एसपी सिंह बघेल पर आरोप था कि 11 अप्रैल को बिना अनुमति के स्टेशन रोड पर बैनर लगाकर 11:00 से दोपहर 3:30 बजे तक भाषण दिए। इस मामले में 38 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें से 25 आरोपियों ने कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उनको जुर्माना अदा करने के बाद बरी कर दिया था। साथ ही दो आरोपी नीतू और सोमेंद्र की पत्रावली अलग कर दी गई। मात्र 11 लोगों पर कोर्ट ने विचार किया।

क्या था मामला
एत्मादपुर के रहने वाले सब्जी व्यापारी नरोत्तम बघेल के साथ मारपीट और पेशाब पिलाने की आपत्तिजनक हरकत की गई थी। इसका आरोप समाजवादी पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष मुस्लिम खान, उनके 4 भाई और पिता पर लगा था। इस घटना से क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। पुलिस ने मुस्लिम खान और उसके भाई को गिरफ्तार करके जेल भेज भेजा था। घटना के चलते धारा 144 लगाई थी। आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की मांग को लेकर बीजेपी ने तहसील पर धरना दिया था।

विरोधाभासी बयानों से मिला लाभ
एमपी एमएलए कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह पेश किए गए। इनमें रईस खान, श्याम प्रकाश, हेड कॉन्स्टेबल मानवेंद्र सिंह, कॉन्स्टेबल पंकज, हेड कॉन्स्टेबल नरेश पाल, सिंह सुरेश चंद, हेड कॉन्स्टेबल राकेश कुमार और पुरुषोत्तम दास गुप्ता के बयान दर्ज कराए गए। स्पेशल जज एमपी एमएलए अर्जुन ने सभी गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाया था, जिसके आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया। मामले में पैरवी करने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता हेमेंद्र शर्मा, केके शर्मा, विजय कांत शर्मा और अनिल शर्मा शामिल थे।

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